पूर्णिया में पुल धड़ाम! बकरा नदी पर बना सोनापुर पुल टूटा, बालू लदा ट्रक नदी में समाया
Purnia Bridge Collapse: पूर्णिया जिले के असियानी गांव में बकरा नदी पर बना सोनापुर पुल अचानक ध्वस्त हो गया। बालू से भरा एक भारी ट्रक पुल के साथ नदी में जा गिरा, हालांकि चालक ने कूदकर अपनी जान बचाई। इस घटना से जलालगढ़-अमौर संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है।
Purnia Bridge Collapse: बिहार के पूर्णिया जिले में बाढ़ के कहर के बीच एक बड़ी घटना सामने आई है। मौर प्रखण्ड के तियरपाड़ा पंचायत के असियानी गांव में बकरा नदी पर बना सोनापुर पुल अचानक ध्वस्त हो गया है। इस अप्रत्याशित घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
बालू से खचाखच लदा भारी ट्रक जैसे ही असियानी घाट पुल के बीचों-बीच पहुंचा, पुराना लोहे का ढांचा अत्यधिक वजन नहीं झेल सका और तेज आवाज के साथ टूटकर नदी में गिर पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह हादसा करीब 11 बजे हुआ, जब बालू से लदा एक ट्रक इस पुल से गुजर रहा था। पुल के टूटते ही ट्रक सीधे बकरा नदी में समा गया। गनीमत रही कि ट्रक चालक ने समय रहते छलांग लगाकर अपनी जान बचा ली। फिलहाल, ट्रक पूरी तरह से नदी में डूबा हुआ है।
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पूर्णिया में बड़ा हादसा: बालू लदा ट्रक गुजरते ही भरभराकर ढहा पुल, परमान नदी में समाया वाहन, रास्ता बंद!
Purnea bridge collapse: बिहार के पूर्णिया जिले में रविवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। अमौर प्रखंड के तियरपाड़ा पंचायत स्थित असिअनी घाट पर परमान नदी पर बना पुराना लोहे का पुल अचानक टूटकर ढह गया। यह घटना उस वक्त हुई जब बालू से लदा एक ओवरलोड ट्रक इस जर्जर पुल से गुजर रहा था। पुल के टूटते ही ट्रक सीधे नदी की गहराई में जा गिरा।
गनीमत रही कि पुल के गिरने का अहसास होते ही ट्रक चालक ने तत्परता दिखाते हुए छलांग लगा दी, जिससे उसकी जान बच गई। इस भीषण हादसे के बाद जलालगढ़-अमौर संपर्क मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है, जिससे दर्जनों गांवों का सीधा संपर्क टूट गया है।
ओवरलोडिंग और जर्जर पुल की अनदेखी ने ली जान
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह दर्दनाक दुर्घटना रविवार को सुबह करीब 11:30 बजे हुई। जैसे ही बालू से खचाखच भरा भारी ट्रक असियानी घाट पुल के बीच पहुंचा, पुल का पुराना लोहे का ढांचा अत्यधिक भार सहन नहीं कर पाया और एक तेज आवाज के साथ टूटकर परमान नदी में जा गिरा। ट्रक के नदी में समाते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आसपास के सैकड़ों ग्रामीण तुरंत मौके पर जमा हो गए।
ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) के कार्यपालक अभियंता और एसडीओ कालेश्वर प्रसाद ने इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पुल ध्वस्त होने की सूचना मिलते ही विभागीय तकनीकी टीम के साथ वे तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं। अमौर की अंचलाधिकारी (सीओ) शबीना खातून ने बताया कि एहतियात के तौर पर और बचाव व निगरानी के लिए राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम को भी मौके पर पहुंचने का निर्देश जारी किया गया है।
नए पुल निर्माण में भारी लापरवाही, ढाई साल में सिर्फ दो पिलर
स्थानीय नागरिकों में इस हादसे को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यह लोहे का पुल दशकों पुराना और बेहद जर्जर हो चुका था। ग्रामीणों की लगातार मांग के बाद इसके ठीक बगल में लगभग ढाई साल पहले एक नए पक्के पुल का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। हालांकि, संवेदक और विभागीय अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण ढाई सालों में अब तक सिर्फ दो पिलर (पाया) ही खड़े किए जा सके हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि अगर नया पुल समय पर बनकर तैयार हो जाता, तो आज यह दुखद घटना नहीं होती।
अमौर की अंचलाधिकारी शबीना खातून ने कहा, “एहतियात के तौर पर और नदी में राहत-बचाव व स्थिति की निगरानी के लिए राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम को तत्काल मौके पर पहुंचने का निर्देश जारी कर दिया गया है।”
हादसे के बाद जलालगढ़ से असियानी होते हुए अमौर जाने वाले प्रमुख संपर्क मार्ग पर परिचालन पूरी तरह से रुक गया है। मौके पर जुटे ग्रामीणों ने प्रशासन पर सीधा आरोप लगाया कि उनकी नाक के नीचे इलाके में धड़ल्ले से अवैध बालू खनन और बेखौफ ओवरलोड ट्रकों का परिचालन हो रहा है। ग्रामीणों ने न केवल जर्जर पुल के रखरखाव में अनदेखी बल्कि नए पुल के निर्माण की कछुआ चाल को लेकर संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। इस Purnea bridge collapse की घटना ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोनापुर पुल के टूटने के कारण जलालगढ़ से असियानी होते हुए अमौर जाने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग पूरी तरह से ठप हो गया है। इस वजह से दोनों ओर के दर्जनों गाँवों का संपर्क टूट गया है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब पूर्णिया जिले में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।
बाढ़ की स्थिति और प्रशासनिक निगरानी
पूर्णिया जिले में महानंदा, कनकई और परमान नदियों का जलस्तर लगातार कम हो रहा है, हालांकि परमान नदी में हल्की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रशासन नदियों के जलस्तर और कटाव की लगातार निगरानी कर रहा है। आवश्यकतानुसार जल संसाधन विभाग द्वारा कटाव निरोधक कार्य भी चलाए जा रहे हैं।
एसडीएम अभिषेक रंजन ने बताया, ‘नदियों के जलस्तर में कमी जारी है। प्रशासन जलस्तर एवं नदी कटाव की लगातार निगरानी कर रहा है। वहीं आवश्यकता अनुसार जल संसाधन विभाग के द्वारा कटाव निरोधक कार्य चलाया जा रहा है।’
पूर्णिया केंद्रीय जल आयोग के अधिकारी अभिषेक लकड़ा ने जानकारी दी कि महानंदा, परमान और कनकई नदियों का जलस्तर घट रहा है। किशनगंज जिले के तैयबपुर में महानंदा का डेंजर लेवल 66.000 मीटर है। शुक्रवार शाम 5 बजे यह 63.430 मीटर था, जो 24 घंटे में हल्की वृद्धि के बाद शनिवार को 63.540 मीटर पर पहुंच गया। पूर्णिया के डेगराह घाट में डेंजर लेवल 35.650 मीटर है, जो शुक्रवार शाम के 33.820 मीटर से कम होकर शनिवार को 33.760 मीटर पर आ गया है।
राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम सभी अत्याधुनिक उपकरणों के साथ किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए ‘रेडी टू मूव’ स्थिति में पूरी तरह तैयार है। जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार के निर्देश पर जिला प्रशासन पूर्णिया द्वारा बाढ़ व जलभराव की स्थिति से निपटने तथा आपातकालीन तैयारियों का जायजा लेने के लिए एडीएमओ प्रणव कुमार बायसी स्थित डिस्ट्रिक्ट इमरजेंसी रिस्पॉन्स फैसिलिटी-कम-ट्रेनिंग सेंटर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान बायसी केंद्र में आपातकालीन संसाधनों की समीक्षा की गई।
प्रभावित अंचलों में आमजन के सुरक्षित आवागमन के लिए कुल 35 नावें (28 सरकारी एवं 7 निजी) निरंतर चलाई जा रही हैं:
रूपौली: 15 नावें (11 सरकारी, 4 निजी)
अमौर: 11 नावें (सभी निजी)
बैसा: 7 नावें (2 सरकारी, 5 निजी)
बायसी: 2 नावें (1 सरकारी, 1 निजी)
रूपौली के जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालकों की सहायता के लिए अब तक 118 क्विंटल सूखा पशुचारा वितरित किया जा चुका है। जलजमाव वाले इलाकों में स्वच्छता बनाए रखने हेतु रूपौली के सोहरा दियारा में 2 अस्थायी शौचालयों का संचालन किया जा रहा है। जिला प्रशासन स्थिति पर लगातार और सूक्ष्म निगरानी रख रहा है। सभी संबंधित अंचल अधिकारियों को चौबीसों घंटे सतर्क रहने का सख्त निर्देश दिया गया है।
किसी भी आकस्मिक अथवा आपातकालीन स्थिति में सहायता के लिए आम नागरिक तुरंत संबंधित अंचल कार्यालय या जिला आपातकालीन संचालन केंद्र के निम्नलिखित दूरभाष नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
हेल्पलाइन नंबर
06454-242317
06454-242319
06454-242320
यह हेल्पलाइन नंबर बाढ़ और अन्य आपात स्थितियों में नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण सहायता प्रदान कर रहे हैं। प्रशासन जनता की सुरक्षा और राहत सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।
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