Darbhanga Teacher’s Day: दरभंगा के सुपौल बाजार डुमरी रोड स्थित गुरुकुल क्लासेस एंड लाइब्रेरी में शिक्षक दिवस पर गुरु-शिष्य की प्राचीन परंपरा जीवंत हो उठी। शिक्षा के साथ संस्कार देने वाले इस संस्थान ने पिछले 13 वर्षों से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चों के भविष्य को संवारने का काम किया है। इस विशेष अवसर पर हुए समारोह में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी प्रभाकर तिवारी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की, जिन्होंने गुरुकुल के प्रयासों की जमकर सराहना की।

गुरु-पूजन की अनुपम झांकी और सम्मान की परंपरा
शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन गुरुकुल क्लासेस एंड लाइब्रेरी के हॉल में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों और गुरुजनों के सम्मान के साथ हुई, जहां उन्हें मिथिला की परंपरा अनुसार पाग, चादर, प्रतीक चिन्ह और कलम भेंट किए गए। इसके बाद सभी सम्मानित शिक्षकों एवं अतिथियों का चरण प्रक्षालन, आरती, चंदन-वंदन और रक्षा सूत्र बांधकर गुरु-पूजन किया गया। ‘गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः’ मंत्र के उच्चारण के साथ गुरु-शिष्य की इस पवित्र परंपरा का निर्वहन किया गया, जो छात्र-छात्राओं द्वारा गुरुजनों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक विशेष आकर्षण रहा।
इस अवसर पर बचपन के गुरु शंभू चौधरी, अजीत चौधरी सर और पूज्य पिताजी राम शंकर चौधरी का भी विशेष स्वागत किया गया। दीप प्रज्वलन के दौरान डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की परंपरा को याद किया गया। साथ ही, महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के शिक्षा, विज्ञान और युवाओं के प्रति प्रेरणादायी योगदान को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में केक काटकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
‘ज्ञान, संस्कार और अच्छे चरित्र का निर्माण’: SDPO प्रभाकर तिवारी
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी प्रभाकर तिवारी ने अपने संबोधन में कहा, ‘मैंने भी अपने जीवन की यात्रा सरकारी शिक्षक के रूप में शुरू की थी। शिक्षक के रूप में सेवा देने के बाद आज प्रशासनिक पद पर हूं, लेकिन शिक्षा और गुरुजनों के प्रति सम्मान की भावना आज भी मेरे मन में उतनी ही गहरी है। गुरुकुल में गुरु-पूजन की इस परंपरा को देखकर मुझे अपने शिक्षक जीवन की यादें ताजा हो गईं। यह आयोजन समाज में ज्ञान, संस्कार और अच्छे चरित्र का निर्माण करने वाला प्रयास है।’
समाजसेवा के प्रेरणास्रोत संजय कुमार सिंह उर्फ पप्पू सिंह ने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि गुरुकुल में शिक्षकों और अतिथियों का जिस श्रद्धा के साथ सम्मान किया गया, वह अत्यंत सराहनीय है। ऐसे आयोजन बच्चों में संस्कार, अनुशासन और बड़ों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करते हैं। अनुमंडल राज्यसभा सांसद प्रतिनिधि संजीव कुमार झा ने भी गुरुजनों के सम्मान को हमारी संस्कृति की पहचान बताया और गुरुकुल के शिक्षा के साथ संस्कार देने के प्रयास को प्रेरणादायी कहा।
13 वर्षों की तपस्या, समाज सेवा का पर्याय बना गुरुकुल
इस समारोह में छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया। संस्था की 13 वर्षों की यात्रा को याद करते हुए बताया गया कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले अनेक छात्र-छात्राएं आज सरकारी सेवा सहित विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह गुरुकुल के शैक्षणिक प्रयासों के साथ-साथ चरित्र निर्माण और समाज निर्माण की दिशा में किए जा रहे कार्यों का प्रत्यक्ष परिणाम है।
यह समारोह केवल एक वार्षिक आयोजन भर नहीं था, बल्कि यह इस बात का प्रमाण था कि कैसे शिक्षा और पारंपरिक मूल्यों का मेल एक सशक्त और संस्कारवान समाज की नींव रख सकता है। गुरुकुल क्लासेस एंड लाइब्रेरी का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।








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