Bihar Teacher Salary: बिहार में अब शिक्षकों और कर्मचारियों की लापरवाही भारी पड़ सकती है। उच्च शिक्षा विभाग ने अनुदानित इंटरमीडिएट और संबद्ध डिग्री कॉलेजों में बायोमेट्रिक हाजिरी को अनिवार्य कर दिया है। आदेश का पालन नहीं करने वाले शिक्षकों और कर्मियों के वेतन की अनुदान राशि रोकी जा सकती है, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ जाएंगी। विभाग ने 235 संबंधित कॉलेजों से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि रजिस्टर में हाजिरी दर्ज करने के साथ-साथ बायोमेट्रिक उपस्थिति भी अनिवार्य होगी। विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सभी शिक्षक और कर्मचारी नियमित रूप से बायोमेट्रिक प्रणाली का उपयोग करें। प्राचार्यों को जल्द से जल्द बायोमेट्रिक उपस्थिति से जुड़ी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद जिन कॉलेजों या कर्मचारियों के स्तर पर लापरवाही सामने आएगी, उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
उच्च शिक्षा विभाग ने साफ संकेत दिया है कि बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं करने वाले शिक्षकों और कर्मियों के वेतन की अनुदान राशि पर रोक लगाई जा सकती है।
बायोमेट्रिक हाजिरी से जुड़ी व्यवस्था
यह व्यवस्था इसी साल मई में जारी किए गए आदेश के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की गई है। केवल कॉलेज ही नहीं, बल्कि एग्जाम रिजल्ट के आधार पर अनुदान प्राप्त करने वाले माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में भी शिक्षकों और कर्मियों के बीच अनुदान राशि के वितरण के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति को आधार बनाया गया है। यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
अनुदान राशि वितरण के लिए तय की गईं श्रेणियां
विभाग ने स्कूलों और कॉलेजों में अनुदान राशि के वितरण के लिए कर्मचारियों को चार मुख्य श्रेणियों में बांटा है। यह वर्गीकरण सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक पद के अनुसार अनुदान राशि का वितरण हो। सबसे अधिक राशि प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक को मिलेगी, जिसके बाद शिक्षक और व्याख्याताओं को।
| श्रेणी संख्या | कर्मचारी वर्ग |
|---|---|
| पहली | प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक |
| दूसरी | शिक्षक और व्याख्याता |
| तीसरी | प्रयोगशाला तकनीशियन, कंप्यूटर सहायक, पुस्तकालयाध्यक्ष और कार्यालय सहायक |
| चौथी | केयरटेकर और ऑफिस अटेंडेंट |
यह वर्गीकरण अनुदान राशि के न्यायसंगत वितरण को सुनिश्चित करेगा और कर्मचारियों को उनकी भूमिका के अनुसार लाभ मिलेगा।
आगे क्या होगा?
अब सभी की निगाहें 235 कॉलेजों से आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट ही तय करेगी कि किन संस्थानों ने बायोमेट्रिक व्यवस्था का ईमानदारी से पालन किया है और कहां लापरवाही बरती गई है। रिपोर्ट के आधार पर उच्च शिक्षा विभाग उन सभी कॉलेजों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा, जिन्होंने नियमों की अनदेखी की है। इस कदम से राज्य की शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।







