Bihar Fire: दरभंगा DMCH पर आफत ही आफ़त- पहले हड़ताल अब DMCH में आधी रात लगी आग: नवजात को गोद में लेकर भागीं माएं, अस्पताल में मची चीख-पुकार! डॉक्टरों और मरीजों की आपसी रस्साकसी थमी नहीं कि dmch आग के लपटों में घिर गई। हालात बेकाबू होते मगर गनीमत रही। बच्चों को लेकर भागती बदहवास माँ का चेहरा रात के सन्नाटे में जो दिखी बड़ा भयावह दृश्य था।
बिहार के दरभंगा जिले में स्थित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के अधीन आने वाले दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (DMCH) के मदर चाइल्ड अस्पताल (MCH) में शुक्रवार आधी रात भीषण आग लग गई। शॉर्ट सर्किट से लगी इस आग के कारण वार्ड में भर्ती प्रसूताओं और नवजात बच्चों के बीच अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने के लिए महिलाएं अपने नवजात शिशुओं को गोद में लेकर सुरक्षित स्थान की ओर भागीं, जिससे पूरे अस्पताल में हड़कंप मच गया।

शॉर्ट सर्किट से निकली चिंगारी और धमाके से दहशत
अस्पताल के एमसीएच वार्ड में आधी रात के करीब बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट हुआ। बताया जा रहा है कि तारों से चिंगारी निकलने के बाद जोरदार धमाका हुआ, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को दहशत में डाल दिया। देखते ही देखते पूरे वार्ड में दमघोंटू धुआं भर गया, जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया।
प्रसूताओं और नवजातों पर संकट, तुरंत हुई निकासी
आग लगने और धुएं के कारण सबसे अधिक खतरा प्रसूताओं और उनके नवजात बच्चों को था। अपनी जान और बच्चों की सुरक्षा के लिए घबराई हुई माएं तुरंत अपने नवजात शिशुओं को गोद में लेकर वार्ड से बाहर भागीं।
अस्पताल प्रशासन ने भी स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल मरीजों और उनके परिजनों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। स्वास्थ्यकर्मी भी इस दौरान सक्रिय रहे।
अस्पताल प्रशासन की मुस्तैदी से बड़ा बिहार फायर हादसा टला
अस्पताल के कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आग बुझाने का काम शुरू किया। दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही अस्पताल के अपने संसाधनों से आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया था।
इस मुस्तैदी के कारण किसी भी बड़े जानमाल के नुकसान से बचा जा सका, हालांकि कुछ समय के लिए पूरे अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बना रहा।
फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है और स्थिति सामान्य हो गई है। घटना के बाद अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था और बिजली के तारों की जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

