Bihar Health Services: बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राजधानी पटना में स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के प्राचार्यों, अधीक्षकों, निदेशकों, और स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना और आम जनता तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना था।
बिहार में कैंसर से मिलेगी मुक्ति! 5 शहरों में खुलेंगे सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, जानें कब से मिलेगा लाभ
Bihar Cancer Treatment: बिहार में कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने मरीजों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में सुपर स्पेशलिटी रेडियोथेरेपी इकाइयां स्थापित की जाएंगी, जिससे कैंसर मरीजों को अपने ही राज्य में उन्नत उपचार मिल सकेगा। यह पहल राज्य के बाहर इलाज के लिए जाने वाले मरीजों की संख्या को कम करने और समय पर, आधुनिक कैंसर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है।






कैंसर उपचार के लिए नई रणनीति
बैठक में राज्य के कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों और उपचार सुविधाओं की समीक्षा की गई। इसमें रेडियोथेरेपी बुनियादी ढांचे के साथ-साथ कीमोथेरेपी और बायोप्सी सेवाओं के विस्तार पर भी चर्चा हुई। स्वास्थ्य मंत्री निशिकांत ने कहा कि नियमित जांच और जन जागरूकता कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने में मदद कर सकती है। उन्होंने शुरुआती निदान और सुलभ उपचार के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सरकार रोग के प्रारंभिक चरणों में मरीजों की देखभाल में सुधार के लिए एक रणनीति तैयार कर रही है। अधिकारियों ने बिहार में कैंसर देखभाल वितरण को बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों के बीच समन्वय मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श किया।
स्वास्थ्य मंत्री निशिकांत ने जोर देकर कहा, “नियमित जांच और जन जागरूकता कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने में सहायक है। सरकार प्रारंभिक चरण के मरीजों के लिए बेहतर उपचार रणनीति बना रही है।”
जागरूकता अभियान और तंबाकू नियंत्रण
स्वास्थ्य विभाग युवाओं को लक्षित कर कैंसर जागरूकता अभियानों को तेज करेगा। स्कूलों और कॉलेजों में तंबाकू विरोधी कार्यक्रम चलाए जाएंगे। मंत्री ने कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवन शैली के महत्व पर भी जोर दिया। इस बैठक में स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि, कैंसर विशेषज्ञ और होमी भाभा कैंसर अस्पताल व अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने कैंसर की रोकथाम और उपचार को मजबूत करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
व्यापक स्क्रीनिंग कार्यक्रम की योजना
राज्य सरकार गर्भाशय, स्तन और प्रोस्टेट कैंसर की जांच के लिए एक व्यापक प्रारंभिक पहचान अभियान के माध्यम से स्क्रीनिंग का विस्तार करने की योजना बना रही है। इस पहल में उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए भी कैंसर स्क्रीनिंग शामिल होगी। इस अभियान में लगभग एक लाख आशा कार्यकर्ता शामिल होंगी, और ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अधिकारियों ने कहा कि इसका उद्देश्य प्रारंभिक निदान में सुधार करना है, जिससे सफल उपचार की संभावना काफी बढ़ जाती है।
सर्वाधिक मामले ओरल कैंसर के
बैठक में समीक्षा किए गए आंकड़ों के अनुसार, बिहार में एनपी-एनसीडी पोर्टल के माध्यम से कैंसर स्क्रीनिंग की जा रही है। 38 कैंसर डे-केयर स्क्रीनिंग केंद्रों के 1,293 प्रतिभागियों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 519 लोगों को कैंसर था, 344 को कैंसर-पूर्व की स्थिति थी और 430 स्वस्थ थे।
| कैंसर का प्रकार | मामलों का प्रतिशत |
|---|---|
| ओरल कैंसर | 43.5% |
| स्तन कैंसर | 27.2% |
| गर्भाशय कैंसर | 15.2% |
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि कई मरीज बीमारी के तीसरे या चौथे चरण में पहुंचने के बाद ही उपचार के लिए आते हैं।
तंबाकू का सेवन अधिकांश मामलों से जुड़ा
अध्ययन में पाया गया कि कैंसर या कैंसर-पूर्व की स्थिति वाले 60.2 प्रतिशत लोग तंबाकू उत्पादों का सेवन करते थे, जबकि स्वस्थ प्रतिभागियों में यह आंकड़ा 30.2 प्रतिशत था। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, खैनी, गुटखा और जर्दा जैसे धुआं रहित तंबाकू उत्पाद बिहार में कैंसर के मामलों में प्रमुख योगदानकर्ताओं में से हैं। स्वास्थ्य विभाग छात्रों और युवाओं के बीच तंबाकू नियंत्रण अभियानों को मजबूत करने की योजना बना रहा है।
बिहार में 1.10 करोड़ से अधिक लोगों की ओरल कैंसर स्क्रीनिंग
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, राज्य में 1.10 करोड़ से अधिक लोगों की ओरल कैंसर स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 25,637 मरीजों की पहचान हुई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पहचाने गए लोगों में से 97.5 प्रतिशत का इलाज चल रहा है। 4.17 लाख से अधिक महिलाओं की स्तन कैंसर स्क्रीनिंग में 1,711 मामले सामने आए, जबकि 15.75 लाख महिलाओं की गर्भाशय कैंसर स्क्रीनिंग में 2,442 मरीजों की पहचान हुई। 2026-27 वित्तीय वर्ष में भी स्क्रीनिंग अभियान जारी है, और अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं कि कार्यक्रम के माध्यम से निदान किए गए मरीजों को समय पर उपचार मिले। पढ़िए विस्तार से
बिहार में स्वास्थ्य का नया युग! मंत्री निशांत का बड़ा ऐलान, अब हर मरीज का होगा इलाज, नहीं रुकेगी सर्जरी
Bihar Health Services: बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने राजधानी पटना में शीर्ष चिकित्सा संस्थानों के प्राचार्यों, निदेशकों और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गहन समीक्षा बैठक की। इस बैठक में मरीजों को समय पर इलाज सुनिश्चित करने और लंबित सर्जरियों के बोझ को खत्म करने के लिए कई निर्णायक फैसले लिए गए, जो बिहार के लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आएंगे।बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय जिलों के मेडिकल कॉलेजों में लंबे समय से अटकी पड़ी सर्जरियों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराना था। मंत्री निशांत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी मेडिकल कॉलेज लंबित ऑपरेशनों की अद्यतन सूची तुरंत तैयार करें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हो, तो मरीजों को IGIMS, AIIMS और Medanta जैसे बड़े संस्थानों में सर्जरी के लिए भेजा जाए ताकि किसी भी ऑपरेशन में अनावश्यक देरी न हो।स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य में सर्वाइकल, ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर की व्यापक स्क्रीनिंग को एक जन-आंदोलन का रूप देने पर विशेष जोर दिया। इस महत्वपूर्ण अभियान से लगभग एक लाख आशा कार्यकर्ताओं को जोड़ा जाएगा, जिससे घर-घर तक जागरूकता और जांच सुविधा पहुंच सके। इसके साथ ही, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसे गैर-संचारी रोगों से पीड़ित मरीजों की नियमित कैंसर जांच सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
आपातकालीन सेवाओं को मिलेगी नई शक्ति, तुरंत होगी रिक्त पदों पर भर्ती
अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के लिए बेड क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। राज्यभर में उपलब्ध इमरजेंसी बेड की वास्तविक समय की जानकारी देने वाला एक केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर भी विकसित किया जाएगा, जिससे मरीजों को सही समय पर सही अस्पताल मिल सके। इसके अतिरिक्त, अस्पताल परिसरों में विभागों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की विस्तृत जानकारी दर्शाने वाले बड़े डिस्प्ले बोर्ड लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में ओटी असिस्टेंट, ओटी तकनीशियन, डाटा ऑपरेटर, सहायक प्राध्यापक और एसोसिएट प्रोफेसर के रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का भी आदेश दिया गया है। सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों को शुक्रवार तक लंबित सर्जरियों की अद्यतन प्रतीक्षा सूची उपलब्ध कराने को कहा गया है।
अत्याधुनिक उपकरण और आयुष्मान का लाभ, हर नागरिक तक पहुंचेगी सुविधा
बैठक में सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में बाहरी विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। अस्पतालों को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों और आधुनिक मशीनों से सुसज्जित करने के निर्देश दिए गए, जिससे इलाज की गुणवत्ता में सुधार हो सके। मुख्यमंत्री सहायता कोष और आयुष्मान भारत योजना का अधिकतम लाभ पात्र मरीजों तक पहुंचाने पर भी विशेष बल दिया गया। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी जरूरतमंद मरीज वित्तीय बाधाओं के कारण इलाज से वंचित न रहे।
सरकार का लक्ष्य बिहार के प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी बनाने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत के इन निर्देशों से बिहार की स्वास्थ्य प्रणाली में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। लंबित ऑपरेशनों का तेजी से निपटारा, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की शुरुआती जांच और आपातकालीन सेवाओं का सुदृढीकरण राज्य के नागरिकों के स्वास्थ्य हित में मील का पत्थर साबित होगा। इन फैसलों से यह सुनिश्चित होगा कि हर व्यक्ति को बेहतर और समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
लंबित सर्जरियां अब नहीं टलेंगी, मंत्री ने दिए कड़े निर्देश
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने बैठक में सबसे अहम निर्देश जिलों के मेडिकल कॉलेजों में लंबित सर्जरियों को लेकर दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी मेडिकल कॉलेज लंबित ऑपरेशन की अद्यतन सूची शुक्रवार तक तैयार करें। आवश्यकता पड़ने पर मरीजों की सर्जरी IGIMS, AIIMS और Medanta जैसे बड़े संस्थानों में भी कराई जाए। मंत्री ने यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी मरीज का ऑपरेशन अनावश्यक रूप से लंबित न रहे, ताकि उन्हें समय पर उपचार मिल सके।

एक लाख आशा कार्यकर्ता करेंगी कैंसर की जांच
राज्य में सर्वाइकल, ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग को जन-आंदोलन का रूप देने पर भी मंत्री निशांत ने जोर दिया। इस बड़े अभियान के लिए लगभग एक लाख आशा कार्यकर्ताओं को जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसे गैर-संचारी रोगों से पीड़ित मरीजों की नियमित कैंसर जांच सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह पहल बिहार में कैंसर की रोकथाम और शीघ्र पहचान में मील का पत्थर साबित होगी।
अस्पतालों में बढ़ेंगी सुविधाएं, रिक्त पदों पर होगी भर्ती
बैठक में सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में बाहरी विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध कराने, अस्पतालों को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों और आधुनिक मशीनों से सुसज्जित करने पर भी बल दिया गया। मुख्यमंत्री सहायता कोष और आयुष्मान भारत योजना का अधिकतम लाभ पात्र मरीजों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए। इमरजेंसी सेवाओं को मजबूत करने के लिए अस्पतालों में बेड क्षमता बढ़ाने और राज्यभर में उपलब्ध इमरजेंसी बेड की रियल-टाइम जानकारी देने वाला केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर विकसित करने का निर्णय लिया गया है। अस्पताल परिसरों में विभागों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देने वाले बड़े डिस्प्ले बोर्ड लगाने के निर्देश भी दिए गए।स्वास्थ्य मंत्री ने मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में ओटी असिस्टेंट, ओटी तकनीशियन, डाटा ऑपरेटर, सहायक प्राध्यापक और एसोसिएट प्रोफेसर के रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का भी निर्देश दिया।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने स्पष्ट कहा, ‘सरकार का लक्ष्य बिहार के प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी बनाने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।’
सरकार का यह प्रयास राज्य के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने और स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।









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