Darbhanga News: दरभंगा जिला बार एसोसिएशन भवन में शुक्रवार को अधिवक्ताओं ने भारत के दो महान सपूतों को याद किया। इस मौके पर हिंदी और उर्दू के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती तथा अमर शहीद उधम सिंह के बलिदान दिवस पर उनके चित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरीय अधिवक्ता जितेंद्र नारायण झा ने की।
वकीलों ने इन दोनों विभूतियों के योगदान को याद करते हुए कहा कि 31 जुलाई का दिन भारत के इतिहास में इन दोनों के नाम से स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। यह दिन साहित्य और शौर्य, दोनों की गाथा बयां करता है। अधिवक्ताओं ने उनके आदर्शों और बलिदान से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया।






साहित्य के पुरोधा मुंशी प्रेमचंद: कलम से जगाई चेतना
अधिवक्ता अरुण कुमार चौधरी ने मुंशी प्रेमचंद के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के लमही गाँव में धनपत राय श्रीवास्तव का जन्म हुआ था। उन्हें कथा साहित्य का पुरोधा माना जाता है। प्रेमचंद ने स्थानीय विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्य किया और बाद में शिक्षा विभाग में इंस्पेक्टर के पद तक पहुंचे।
महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर मुंशी प्रेमचंद ने सरकारी नौकरी से त्याग पत्र दे दिया था। उनके प्रसिद्ध उपन्यासों में ‘गोदान’, ‘निर्मला’, ‘रंगभूमि’ और ‘कर्मभूमि’ शामिल हैं। वहीं, उनकी कहानियों में ‘पंच परमेश्वर’, ‘कफन’ और ‘दो बैलों की कथा’ आज भी लोगों के दिलों में बसी हैं। बाद में वे ‘मुंशी प्रेमचंद’ के नाम से विश्व विख्यात हुए…अधिवक्ता अरुण कुमार चौधरी
अमर शहीद उधम सिंह: जलियांवाला बाग का लिया बदला
इसी दिन पंजाब के वीर सपूत उधम सिंह का शहीदी दिवस भी मनाया जाता है। अधिवक्ता चौधरी ने बताया कि उधम सिंह ने 1919 में अमृतसर में हुए भयावह जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला लिया था। उन्होंने लंदन जाकर माइकल ओ’डायर की हत्या कर दी, जो इस नरसंहार के लिए जिम्मेदार था।
इस साहसिक कार्य के लिए उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई और 31 जुलाई 1940 को वे हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए। वकीलों ने इन दोनों महान विभूतियों के योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया।
अधिवक्ताओं की उपस्थिति
इस अवसर पर हरिशंकर सिंह, सुरेंद्र कुमार चौधरी, अमरनाथ झा, अनिल कुमार मिश्र, कुमार उत्तम, संजीव कुमार, माया शंकर चौधरी, नवीनेंदु कुमार मिश्रा, हीरा नंद मिश्र, बुलन कुमार झा, श्याम बिहार राय सरस, रमणजी चौधरी, अभय कुमार यादव, रामवृक्ष सहनी, प्रदीप कुमार शांडिल्य और अधिवक्ता लिपिक विनय कुमार झा सहित कई अन्य अधिवक्तागण मौजूद थे। इन सभी ने मिलकर मुंशी प्रेमचंद और उधम सिंह को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।








