Aurangabad Vigilance: भ्रष्टाचार पर नकेल कसते हुए औरंगाबाद शहर में निगरानी विभाग (विजिलेंस) ने बड़ी कार्रवाई की है। रिसियप थाना में तैनात सब-इंस्पेक्टर (एसआई) उमेश कुमार को शुक्रवार को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, क्योंकि विजिलेंस टीम ने शिकायत के सत्यापन के बाद एसआई को पहली किस्त लेते ही दबोच लिया।
निगरानी विभाग की टीम ने शिकायत सही पाए जाने के बाद जाल बिछाकर एसआई उमेश कुमार को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है।
🔥 आज की सबसे ज्यादा पढ़ी गई खबरें1बिहार पंचायत चुनाव पर आई Darbhanga से सबसे बड़ी खबर! अब 7000 की आबादी पर बनेगी नई पंचायत| पढ़िए -रमोली में मंत्री दीपक प्रकाश ने क्या कहा!2Bihar Birth Death Registration जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियम बदले: अब एक छोटी सी गलती पड़ेगी भारी, जानिए नए कानून की पूरी बात!3शिक्षकों के लिए बुरी खबर! HRA पर शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला, अब इन शिक्षकों को नहीं मिलेगा मकान किराया भत्ता| जानिए – नए नियम- किसे मिलेगा/नहीं मिलेगा लाभ?4Jaynagar Janakpur Train नेपाल में भड़की हिंसा का बिहार पर सीधा असर! जयनगर-जनकपुर ट्रेन ठप, अब कैसे जाएंगे जनकपुर? | जानिए कहां लगा लगा अनिश्चितकालीन कर्फ्यू5बड़ी खबर Darbhanga -Sitamadhi Rail Doubling News! दरभंगा-सीतामढ़ी रेल लाइन दोहरीकरण का रास्ता साफ, ₹407 करोड़ से बदलेगी मिथिला की किस्मत! | जुड़ेगा 64 KM कनेक्टिविटी का न्यू चैप्टर6Bihar Traffic Police बिहार में अब पुलिसकर्मी नहीं कर पाएंगे आपकी गाड़ी की चेकिंग | जान लें ये नया नियम! ADG सुधांशु कुमार का सख्त आदेश
विजिलेंस की यह त्वरित कार्रवाई दर्शाती है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मारपीट के मामले में मांगी थी रिश्वत
तेंदुआ गणपत गांव के निवासी डॉ. लक्ष्मण राम ने निगरानी विभाग से शिकायत की थी। उन्होंने बताया था कि मारपीट के एक मामले की जांच कर रहे एसआई उमेश कुमार उनसे केस में राहत देने के नाम पर रिश्वत की मांग कर रहे थे। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने सबसे पहले आरोपों का गहन सत्यापन किया। जब शिकायत सही पाई गई, तो एक ट्रैप की योजना बनाई गई ताकि आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा जा सके।
डॉ. लक्ष्मण राम के अनुसार, एसआई उमेश कुमार उनसे डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत मांग रहे थे। बाद में यह सौदा एक लाख रुपये में तय हुआ, जिसमें 50 हजार रुपये पहले और बाकी 50 हजार रुपये बाद में देने की बात हुई थी।
नाली-गली विवाद से शुरू हुआ था मामला
यह पूरा मामला गांव में नाली-गली को लेकर चल रहे एक पुराने विवाद से जुड़ा है। 14 जुलाई को इस विवाद ने मारपीट का रूप ले लिया था, जिसमें डॉ. लक्ष्मण राम घायल हो गए थे। उन्हें डायल-112 की टीम ने इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया था। दूसरी तरफ, विपक्षी पक्ष ने भी थाने में आवेदन दिया था। इन दोनों ही मामलों की जांच की जिम्मेदारी एसआई उमेश कुमार को सौंपी गई थी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जांच के दौरान एसआई उन पर लगातार दबाव बना रहे थे। वे कार्रवाई में ढील देने के बदले रिश्वत की मांग कर रहे थे और पैसे न देने पर झूठे मुकदमे में फंसाने तथा परिवार को परेशान करने की धमकी भी देते थे।
रिश्वत के साथ करते थे ‘खातिरदारी’ की मांग
डॉ. लक्ष्मण राम ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि मुलाकात के दौरान एसआई उमेश कुमार अक्सर उनसे नारियल पानी, पेड़ा और आम जैसी चीजें भी मंगवाते थे। रिश्वत की रकम के साथ-साथ ये छोटी-छोटी मांगें भी उत्पीड़न का हिस्सा थीं। जब डॉ. लक्ष्मण राम ने रिश्वत देने से मना किया, तो एसआई ने उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने और उनके परिवार को परेशान करने की धमकी दी।
इसी दबाव और धमकियों से तंग आकर डॉ. लक्ष्मण राम ने निगरानी विभाग से संपर्क किया। विजिलेंस टीम ने योजना के अनुसार, जैसे ही शिकायतकर्ता ने एसआई को 50 हजार रुपये सौंपे, पहले से घात लगाए बैठी टीम ने तत्काल छापेमारी कर उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद, टीम आरोपी अधिकारी को अपने साथ ले गई और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। निगरानी विभाग इस मामले में आगे की जांच कर रहा है और आधिकारिक प्राथमिकी एवं कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।














