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भरत तिवारी एनकाउंटर में गिरी गाज! SDPO राजेश शर्मा लाइन हाजिर, 5 पुलिसकर्मी पहले ही सस्पेंड

Bihar Police Action: भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस की किरकिरी के बाद बिहार सरकार ने सख्त कदम उठाया है। जगदीशपुर के SDPO राजेश शर्मा को लाइन हाजिर कर दिया गया है, क्योंकि मृतक की मां ने उन पर FIR दर्ज कराई थी।

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Bihar Police Action: भोजपुर जिले के शाहपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब जगदीशपुर के एसडीपीओ राजेश शर्मा को ‘लाइन हाजिर’ कर दिया गया है। इस घटना को लेकर पुलिस की लगातार हो रही किरकिरी के बाद बिहार सरकार ने यह बड़ा एक्शन लिया है। उन्हें तत्काल बिहार पुलिस मुख्यालय में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है। नए अधिकारी की तैनाती होने तक यह पद खाली रहेगा।

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मृतक भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी ने एसडीपीओ राजेश शर्मा और शाहपुर के निलंबित थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर राजेश मालाकार सहित कुछ अन्य पुलिसकर्मियों को नामजद अभियुक्त बनाते हुए केस दर्ज कराया था। इस प्राथमिकी में एसडीपीओ पर सीधे आदेश देने का आरोप है, जिसके बाद भरत को पाँच गोलियां लगी थीं।

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एसडीपीओ राजेश शर्मा पर क्यों गिरी गाज?

भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी की शिकायत पर घटना के छठे दिन कांड संख्या 178/26 (दिनांक 22/06/2026) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस प्राथमिकी में आरोपियों पर बीएनएस की धारा 103 (1) (5) के साथ ही आर्म्स एक्ट की धाराएं भी लगाई गई हैं। शिकायत के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने जवइनिया के कटाव पीड़ितों की समस्या जानने के बहाने भरत भूषण तिवारी को ले जाकर गोली मार कर हत्या कर दी। आशा देवी ने अपनी शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा है कि एसडीपीओ के आदेश पर ही भरत को पाँच गोलियां मारी गईं। इस मामले की जांच के लिए इंस्पेक्टर संजीव कुमार को अनुसंधानकर्ता बनाया गया है।

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क्या होता है ‘लाइन हाजिर’ होना?

पुलिस विभाग में ‘लाइन हाजिर’ एक प्रशासनिक प्रक्रिया है। जब किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ गंभीर शिकायत मिलती है या काम में लापरवाही पाई जाती है, तो उन्हें मौजूदा थाने या ड्यूटी से हटाकर पुलिस हेडक्वार्टर या पुलिस लाइन से अटैच कर दिया जाता है। लाइन हाजिर होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी थाने के किसी काम या किसी प्रकार की जांच में शामिल नहीं होते। उन्हें बड़े अधिकारियों की निगरानी में रिपोर्ट देनी पड़ती है।

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यह कार्रवाई एसडीपीओ राजेश शर्मा के लिए भविष्य में मुश्किलें बढ़ा सकती है, क्योंकि नामजद प्राथमिकी दर्ज होने के बाद सरकार ने उन पर सीधे एक्शन लिया है।

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पहले भी हो चुकी है कार्रवाई, न्यायिक जांच आयोग का गठन

भोजपुर एनकाउंटर मामले में सरकार ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए पहले ही न्यायिक जांच आयोग के गठन का फैसला लिया है। इस मामले में अब तक पाँच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। घटना 17 जून की सुबह हुई थी, जब एसटीएफ के साथ शाहपुर पुलिस भरत तिवारी को गिरफ्तार करने बिलौटी गांव पहुंची थी। पुलिस के मुताबिक, भरत भूषण तिवारी ने पुलिस को देखकर भागने की कोशिश की और फायरिंग भी की। बाद में वह हाथ में गन लेकर फेसबुक पर लाइव आया और पुलिसकर्मियों को चुनौती दी। हालांकि, इसी लाइव के दौरान उसने सरेंडर कर दिया और अपनी बंदूक भी छोड़ दी थी, जिसके बाद फेसबुक लाइव बंद हो गया था।

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अब एसडीपीओ राजेश शर्मा के ‘लाइन हाजिर’ होने के बाद इस बहुचर्चित एनकाउंटर मामले में आगे की जांच और भी तेज होने की उम्मीद है। पुलिस मुख्यालय अब जगदीशपुर एसडीपीओ के पद पर नए अधिकारी की नियुक्ति करेगा।

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