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भोजपुर एनकाउंटर: SC ने दी झटका! ‘फर्जी मुठभेड़’ बताकर CBI जांच की मांग पर क्या होगा?

Bihar Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में भारत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई से मना कर दिया है। हालांकि, याचिकाकर्ता ने इसे 'फर्जी एनकाउंटर' बताते हुए CBI जांच और न्यायिक निगरानी की मांग की है, जिससे राज्य में सियासी दबाव बढ़ गया है।

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Bihar Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में भारत भूषण तिवारी की कथित मुठभेड़ में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को इस मामले की सुनवाई के लिए रजिस्ट्रार से संपर्क करने का निर्देश दिया। यह घटना बिहार की राजनीति में गरमाई हुई है और इसे लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

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न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया गया था। याचिकाकर्ता ने भोजपुर एनकाउंटर में तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की अपील की, जिसे लेकर पूरे बिहार में राजनीतिक बहस और सार्वजनिक विरोध तेज हो गया है। हालांकि, अदालत ने त्वरित सुनवाई के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और मामले को सूचीबद्ध कराने के लिए मानक प्रक्रिया का पालन करने की सलाह दी।

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भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर पर PIL, CBI जांच की मांग

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल तिवारी ने एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है, जिसमें भारत भूषण तिवारी की मौत से जुड़े हालात की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। अदालत के समक्ष उल्लेख के दौरान, तिवारी ने तर्क दिया कि एनकाउंटर के मामलों में अक्सर पुलिस एक ही तरह का बहाना बनाती है। पुलिस कहती है कि आरोपी ने भागने की कोशिश की, हथियार छीनने की कोशिश की या अधिकारियों पर हमला किया, जिससे उन्हें आत्मरक्षा में गोली चलाने के लिए मजबूर होना पड़ा। याचिकाकर्ता के अनुसार, भोजपुर मुठभेड़ के हालात करीब से जांच और न्यायिक निगरानी की मांग करते हैं।

‘पुलिस अक्सर एनकाउंटर का एक मानक कारण बताती है: आरोपी ने पुलिस का हथियार छीना, भागने की कोशिश की और पुलिस पर हमला करने की कोशिश की, जिससे अधिकारियों को आत्मरक्षा में गोली चलाने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह एक फर्जी एनकाउंटर है। कोर्ट को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए और जांच का आदेश देना चाहिए।’ – याचिकाकर्ता विशाल तिवारी

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एनकाउंटर पर उठते सवाल और विरोधाभासी बयान

याचिका में कहा गया है कि मुठभेड़ के बाद से ही घटना के कई विरोधाभासी संस्करण सामने आए हैं, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है और पुलिस कार्रवाई के दौरान क्या हुआ, इस पर सवाल उठ रहे हैं। याचिका में तर्क दिया गया है कि जनविश्वास तभी बहाल हो सकता है जब बिहार पुलिस से स्वतंत्र किसी एजेंसी द्वारा जांच की जाए। याचिका के मुताबिक, घटना से जुड़े कई अनसुलझे मुद्दों के लिए निष्पक्ष जांच और न्यायिक निगरानी आवश्यक है। इसमें मृतक के परिवार, राजनीतिक नेताओं और नागरिक समाज समूहों द्वारा उठाई गई चिंताओं को दूर करना शामिल है।

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सीबीआई जांच और निगरानी समिति की मांग

याचिका में इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की गई है। इसके साथ ही, जांच की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के गठन का भी अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि तथ्यों को स्थापित करने और चिंताओं को दूर करने के लिए न्यायिक निगरानी में एक स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

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राज्य सरकार पहले ही करा चुकी है न्यायिक जांच

सुप्रीम कोर्ट की यह कार्यवाही बिहार सरकार द्वारा मुठभेड़ की न्यायिक जांच के आदेश के बीच हुई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में घोषणा की थी कि घटना की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा जांच कराई जाएगी। भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुई इस मुठभेड़ ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन, जवाबदेही की मांग और गहन जांच की अपील को जन्म दिया है। अब जबकि मामला राज्य द्वारा नियुक्त न्यायिक जांच और सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री प्रक्रिया दोनों के समक्ष है, आने वाले हफ्तों में मुठभेड़ की गहन छानबीन होने की उम्मीद है।

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