CJP Protest Supreme Court: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर अपना नरम रुख बरकरार रखा है। शीर्ष अदालत ने सीजेपी के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान दर्ज एफआईआर की दोबारा जांच की मांग वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि मुकदमों को रद्द करने के उसके पुराने फैसले पर पुनर्विचार की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह निर्णय छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया था।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना भी शामिल थे। अदालत का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ठीक एक दिन बाद ही सीजेपी ने जंतर-मंतर पर फिर से प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इस बार उनकी मुख्य मांग देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है।
छात्रों का भविष्य सर्वोपरि: सीजेआई सूर्यकांत
एल रमानाथन की ओर से दायर याचिका में दलील दी गई थी कि पुलिस की कार्यप्रणाली में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे ‘स्वतंत्र और संप्रभु’ हैं। हालांकि, यह याचिका सुप्रीम कोर्ट द्वारा एफआईआर रद्द किए जाने के फैसले से पहले दायर की गई थी। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मुकदमों को रद्द किया था।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘आपका कहना है कि हमें अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था और मुकदमों को रद्द नहीं करना चाहिए था। कृपया इस बात को मानिए कि ये युवा छात्र हैं। हमें उनके पैरेंट्स को देखना है, उनके भविष्य को। हम नहीं चाहते कि उन्हें अदालतों में आना पड़े।’
अदालत ने अपने इस तर्क को समझाने के लिए हाल ही में हिमाचल प्रदेश में कोविड-19 के दौरान हुए एक प्रदर्शन पर दिए गए अपने फैसले का भी जिक्र किया।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश को चुनौती देने की कोशिश
बेंच ने अंततः याचिका को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि इसमें की गई मांगें असल में मुकदमों को रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को चुनौती देने जैसी हैं। सीजेआई ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, ‘आपके क्लाइंट को हमारा आदेश देखना चाहिए। याचिका हमारे पुराने आदेश पर दोबारा विचार की मांग जैसी है।’
गौरतलब है कि इससे पहले नीट पेपर लीक के खिलाफ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी ने जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया था। 20 जुलाई को इसी कड़ी में ‘संसद चलो मार्च’ का आयोजन किया गया था, जिसके दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने एक दर्जन से अधिक एफआईआर दर्ज की थीं। हालांकि, बाद में सीजेपी की मांग और सरकार की सहमति के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी एफआईआर को रद्द कर दिया था, जिससे छात्रों के भविष्य पर कोई दाग न लगे।
सुप्रीम कोर्ट का यह नया फैसला सीजेपी के लिए एक बड़ी राहत है और यह भविष्य के छात्र आंदोलनों के लिए भी एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल कायम करता है। अब देखना होगा कि इस न्यायिक संरक्षण के बीच सीजेपी का आगामी प्रदर्शन कैसा रहता है।







