बिहार में नियोजित शिक्षकों के खिलाफ हो रही कार्रवाई का मामला गरमा गया है। अब इस मामले को लेकर टीईटी शिक्षक संघ ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दरवाज खटखटाया है। संघ ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक एवं विभिन्न जिलों के शिक्षा पदाधिकारियों की ओर से जारी पत्रों को निरस्त करवाने की मांग की है।
वहीं, बिहार में शिक्षक भर्ती नियमावली के खिलाफ धरना-प्रदर्शन में शामिल रहने वाले शिक्षकों के खिलाफ अब कार्रवाई शुरू हो गई है। स्कूल से गायब रहने वाले शिक्षकों को सीधे सस्पेंशन ऑडर की बात कही गई है।






नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग सहित अन्य मामलों को लेकर भाजपा गुरुवार को पटना में विधानसभा घेराव कर रही है। भाजपा को उम्मीद है कि इसमें बड़ी संख्या में राज्य के नियोजित शिक्षक भी शामिल होंगे। विधानसभा का घेराव करेंगे।
लेकिन, भाजपा की रणनीति को बिहार के शिक्षा विभाग ने बड़ा झटका देने की तैयारी कर ली है। शिक्षा विभाग की ओर से पत्र जारी कर कहा गया है कि 13 जुलाई को राज्य के सभी यानी शत प्रतिशत विद्यालयों का निरिक्षण किया जाएगा।
इस संबंध में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक की ओर से राज्य के सभी एडीएम और जिला अधिकारी को पत्र लिखकर निर्देश दिया गया है। शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश में सभी स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति की जांच कराने का आदेश दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने कहा है कि 13 जुलाई को जिले के सभी स्कूलों में सभी शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। इसकी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी जिला स्तरीय पदाधिकारी, अनुमंडल स्तरीय पदाधिकारी एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी और अन्य पदाधिकारियों को दी गई है।








