दरभंगा, देशज टाइम्स अपराध ब्यूरो। दरभंगा जिले के बेंता थाना की थानाध्यक्ष लवली कुमारी को लेकर चर्चा हर चौक-चौराहों हो रही है। हर व्यक्ति की जुबान पर एक ही चर्चा है कि आखिर क्या कारण है कि इतनी गलतियों के बावजूद जिले के एसएसपी ने बेंता थानाध्यक्ष पर कार्रवाई क्यों नहीं की।
चर्चा यह भी है कि कई पुलिस पदाधिकारियों का आशीर्वाद थानाध्यक्ष को प्राप्त है। पुलिस सूत्रों से ही पता चला है कि सिटी एसपी ने बेंता थाना अध्यक्ष के विरुद्ध एक लाख अस्सी हजार रुपये घुस लिये जाने के मामले में जांच कर अपना प्रतिवेदन एसएसपी को सौंप दिया है।

इसके भी कई दिन गुजर गये। इस मामले में उस गाड़ी मालिक अनिल कुमार यानि फौजी से पूछताछ भी कर ली गई। इस मामले में फौजी ने बेंता थानाध्यक्ष की ओर से एक लाख रुपये अस्सी हजार बतौर घूस लिये जाने के बाबत पूरी कहानी भी सिटी एसपी को सुना दिया था।
फौजी ने सिटी एसपी को यह भी बताया था कि इस पूरे मामले को सदर एसडीपीओ ने रफा दफा करने में बड़ी भूमिका निभाई है। वहीं, इस मामले के संज्ञान में आते ही एसडीपीओ को कार्रवाई करना चाहिये था।
बेंता ओपी अध्यक्ष के विरुद्ध सिटी एसपी या एसएसपी को अपने पत्र के माध्यम से कार्रवाई के लिये प्रतिवेदन देना चाहिये था। लेकिन, उन्होंने ऐसा नहीं कर पूरे मामले को ही रफा- दफा कर दिया।
एक तरफ फौजी का आरोप है कि एसडीपीओ अमित कुमार बहुत बड़े घूसखोर हैं। वहीं, दूसरी तरफ एसडीपीओ अमित कुमार कहते हैं कि उनकी जानकारी में मामला नहीं है।
इस लेन-देन के मामले में एसएसपी के नाम पर भी एक लाख रुपये बतौर घूस बेंता थानाध्यक्ष की ओर से लिए जाने की बात फौजी ने कहीं। बताया जा रहा है कि सिटी एसपी ने इस बाबत अपना जांच प्रतिवेदन एसएसपी को भी सौंप दिया है।
अब सवाल उठता है कि एसएसपी ने बेंता थानाध्यक्ष पर कार्रवाई क्यों नहीं की? आखिर इसकी वजह और क्या हो सकती है। एसएसपी को इस मामले में पत्रकारों के सामने पक्ष रखना चाहिये कि यह मामला सही है या बिल्कुल गलत ही है?
बेंता पुलिस ने गाड़ी पकड़ी थी। और, उसे छोड़ा था। जिस पर, अंत्योदय अन्नपूर्णा का अनाज लदा हुआ था। इस गाड़ी का मालिक एवं चालक सेना से सेवानिवृत एक फौजी था, जो बिहार पुलिस में भी कई वर्षों तक सेवा दिया।
उसने एसडीपीओ और सिटी एसपी को पत्र देकर पूरे मामले की सच्चाई से अवगत करा दिया था। यही नहीं, सिटी एसपी के पूछताछ में भी उसने वहीं बात बताई फिर कार्रवाई नहीं होना प्रश्न खड़ा करता ही है।
अब लोग सवाल यह भी कर रहे हैं कि नीचे से ऊपर तक के पुलिस पदाधिकारी बस लेन- देन की भाषा समझते हैं। लोग यह भी कहते हैं कि अगर लेन देन की बात नहीं है तो कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई।
हालांकि कार्रवाई तो उनपर भी होनी चाहिये, जिन्होंने इस मामले को रफा-दफा करने में अपनी महती भूमिका निभाई। जब बेंता थाना अध्यक्ष पर कार्रवाई नहीं हो रही है, तब ऐसे में एसडीपीओ से स्पष्टीकरण कौन पूछेगा और कार्रवाई के लिये कौन सरकार को पत्र देगा।
यहां यह बता दें कि यह घूसखोरी का मामला चल ही रहा था कि थानाध्यक्ष पर दूसरा मामला भी सामने आ गया। एक हत्या के मामले में अपना करिश्माई जादू दिखाकर उसे दुर्घटना का मामला बना दिया। चिमनी भट्ठा मालिक ने थाना ही मैनेज कर लिया। अब इस हत्या जैसे गंभीर मामले को रफा-दफा करने के लिये थानाध्यक्ष ने कितने पैसे लिये होंगे यह तो जांच का विषय है?
इतने कम दिनों में इतनी बड़ी डील थानाध्यक्ष की ओर से की जाय और जांचोपरांत भी कार्रवाई नहीं हो तो दरभंगा पुलिस के तमाम पदाधिकारियों पर सवाल उठना लाजमी है?इससे पुलिस के कार्यशैली का पता लगता है।

















