Bihar Darbhanga Court: बिहार के दरभंगा में न्याय व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा बदलाव सामने आया है। सदर अनुमंडल दंडाधिकारी (SDM) कोर्ट अब सप्ताह में सिर्फ दो दिन ही संचालित होगी। इस संबंध में कार्यालय ज्ञापांक 2781 के तहत 27 जुलाई को आदेश जारी किया गया है। यह फैसला उन हजारों पक्षकारों के लिए चिंता का विषय बन गया है, जो अपने मामलों की सुनवाई के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।
पुराने और नए नियम: क्यों बदला कोर्ट का कार्यदिवस?
जारी सूचना के अनुसार, पहले अनुमंडल दंडाधिकारी कोर्ट मंगलवार और शुक्रवार को संचालित होती थी। लेकिन, प्रशासनिक कारणों से इसमें बदलाव किया गया है। मंगलवार को ‘सहयोग शिविर’ और शुक्रवार को ‘जनता दरबार’ निर्धारित होने के कारण कोर्ट के कार्यदिवस में परिवर्तन किया गया है। अब सदर एसडीएम कोर्ट में सुनवाई सोमवार और गुरुवार को होगी। इस बदलाव ने वकीलों और पक्षकारों को अचंभित कर दिया है।






11:30 बजे के बाद नहीं होगी सुनवाई, जानिए नियम
नए नियमों के तहत, संबंधित पक्षकारों को न्यायालय कार्यदिवस यानी सोमवार और गुरुवार को सुबह 11:30 बजे तक हाजिरी लगाने और पैरवी करने का निर्देश दिया गया है। 11:30 बजे के बाद किसी भी पैरवी को स्वीकार नहीं किया जाएगा और अनुपस्थित माना जाएगा। यह सख्त नियम कोर्ट की कार्यप्रणाली को और भी चुनौतीपूर्ण बना सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो दूरदराज के इलाकों से आते हैं।
“न्यायालय कार्य दिवस में परिवर्तन करते हुए सोमवार और गुरुवार को एसडीएम कोर्ट का संचालन होगा। संबंधित पक्षकारों को न्यायालय कार्य दिवस के 11.30 बजे तक हाजिरी एवं आवश्यक पैरवी करने हेतू निदेशित किया गया है। 11.30 बजे के बाद पैरवी नही स्वीकार करने तथा अनुपस्थित मानने की बातें अंकित की गई है।”
आजादी के बाद पहली बार इतना बड़ा बदलाव
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि नए एसडीएम की पदस्थापना से पहले तक और आजादी से पूर्व से ही, सार्वजनिक अवकाश को छोड़कर, एसडीएम कोर्ट लगभग पूरे सप्ताह (6 दिन) संचालित होती रही है। ऐसे में, सप्ताह में सिर्फ दो दिन कोर्ट चलाने का यह निर्णय एक अभूतपूर्व बदलाव है। इस सूचना को दरभंगा बार एसोसिएशन, सरकारी अधिवक्ता और सभी सहायक अधिवक्ताओं को 27 जुलाई के पत्र के माध्यम से 1 अगस्त को भेजा गया है। बार एसोसिएशन के महासचिव कृष्णकुमार मिश्रा ने इस सूचना को वकीलों के बीच प्रसारित भी कराया है। इस निर्णय का सीधा असर न्याय के लंबित मामलों और उनकी गति पर पड़ेगा, जिससे आम जनता को न्याय मिलने में देरी हो सकती है।








