Bihar Maithili Teacher Recruitment: बिहार में चौथी चरण की शिक्षक भर्ती (TRE-4) के विज्ञापन से मैथिली भाषा को बाहर रखने पर आठ करोड़ भाषियों में गहरा आक्रोश है। संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल प्रदेश की इकलौती भाषा की लगातार अनदेखी को विद्यापति सेवा संस्थान ने मातृभाषा का अपमान बताया है। संस्थान ने इस संबंध में मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को कड़ा आपत्ति पत्र भेजा है, जिसमें तत्काल सुधार की मांग की गई है, अन्यथा प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
शनिवार को विद्यापति सेवा संस्थान ने ई-मेल और पंजीकृत डाक के माध्यम से बिहार सरकार को अपनी नाराजगी से अवगत कराया। संस्थान के महासचिव डॉ. बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने सरकार के इस कदम को अत्यंत निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि सरकार संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल मैथिली के बेरोजगार युवाओं को बार-बार ठगने का काम कर रही है, जो पूरी तरह अनुचित है।






मैथिली की अनदेखी: साजिश या सरकारी लापरवाही?
डॉ. बैजू ने याद दिलाया कि पिछले साल भी शिक्षक नियुक्ति में मैथिली भाषी प्रतिभागियों की अनदेखी की गई थी। उस समय स्थानीय सांसदों और विभिन्न संगठनों के हस्तक्षेप के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने भूल सुधार करते हुए रिक्तियों में मैथिली को शामिल किया था। लेकिन, इस बार फिर प्रकाशित विज्ञापन में मैथिली को शामिल नहीं किया जाना किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी स्तर पर मैथिली के प्रति गंभीर षड्यंत्र चल रहा है और मिथिला व मैथिली के विकास के नाम पर ओछी राजनीति की जा रही है।
मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं. कमलाकांत झा ने कहा कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल बिहार की एकमात्र भाषा मैथिली के साथ ऐसा करके उसकी प्रगति में जानबूझकर बाधा डाली जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि राज-काज की भाषा बनाने में कोताही बरतने के साथ ही मैथिली के शिक्षकों की बहाली में बार-बार नियम-कानूनों की अवहेलना कर मिथिलावासियों और मैथिली भाषी प्रतिभा का घोर अपमान किया जा रहा है।
मिथिलावासी नहीं बैठेंगे चैन से, बड़े आंदोलन की चेतावनी
विद्यापति सेवा संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. बुचरू पासवान ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि कोई मैथिली भाषा के समग्र विकास में रोड़ा डालेगा तो मिथिलावासी चैन से नहीं बैठेंगे। महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान के चेयरमैन हीरा कुमार झा ने भारत की मधुरतम और संपन्न भाषा मैथिली को टीआरई-4 शिक्षक भर्ती की विषयवार रिक्तियों में नजरअंदाज किए जाने को दुखद बताया।
संस्थान के मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने इसे मिथिला की भाषा, संस्कृति और करोड़ों मैथिली भाषियों के सम्मान की उपेक्षा करार दिया। उन्होंने सरकार से तत्काल मैथिली विषय का पद सृजित कर भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की। डॉ. महेंद्र नारायण राम ने बताया कि माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति न होने से छात्रों की पढ़ाई लंबे समय से प्रभावित हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि सरकार टीआरई-4 के विज्ञापन में संशोधन कर मैथिली विषय का पद यथाशीघ्र सृजित नहीं करती है, तो विद्यापति सेवा संस्थान अन्य मैथिली सेवी संस्थानों को एक मंच पर लाकर मिथिला क्षेत्र में चरणबद्ध आंदोलन चलाने को मजबूर होगी।
यह मामला अब बिहार सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि मैथिली भाषियों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है और वे अपनी भाषा के सम्मान के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।








