Bihar Free Electricity: राज्य के घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। बिहार सरकार ने ‘मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना’ (MVUSY) लागू की है, जिसके तहत हर महीने 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त मिलेगी। इस योजना से लाखों परिवारों को सीधे तौर पर फायदा होगा। कई लोगों के मन में सवाल है कि अगर 125 यूनिट से ज़्यादा बिजली खर्च हुई तो क्या होगा, या फिर सोलर पैनल और किराएदारों के लिए क्या नियम हैं? इन सभी सवालों का जवाब विस्तार से समझते हैं।

आपका बिजली बिल कितना आएगा? जानें बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली और स्मार्ट मीटर के नए नियम!
Bihar Electricity: बिहार के घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। राज्य में 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की योजना जुलाई 2025 से लगातार जारी है। इसके साथ ही, अप्रैल 2020 से उपभोक्ताओं से कोई मीटर किराया भी नहीं लिया जा रहा है। बिजली विभाग ने स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के बिजली बिल में हुई तकनीकी गड़बड़ी को भी सुधार लिया है, जिससे लाखों लोगों को राहत मिली है।
स्मार्ट मीटर पर कैसे होता है बिल का हिसाब?
स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं के मासिक बिल हर महीने की 1 और 2 तारीख के बीच, खपत की गई बिजली और दर्ज अधिकतम लोड (मैक्सिमम लोड) के आधार पर तैयार होते हैं। यदि मासिक खपत 125 यूनिट से अधिक होती है, तो उपभोक्ताओं को मुफ्त सीमा से ऊपर की इकाइयों के लिए ऊर्जा शुल्क और बिजली शुल्क का भुगतान करना होगा। इसके अलावा, दर्ज अधिकतम लोड के आधार पर लागू फिक्स्ड चार्ज भी देना होता है।
बिजली विभाग ने स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए बिलिंग प्रक्रिया को एक उदाहरण के माध्यम से समझाया है। यदि कोई शहरी घरेलू उपभोक्ता एक महीने में 200 यूनिट बिजली का उपयोग करता है और उसका दर्ज लोड 2 किलोवाट है, तो अतिरिक्त 75 यूनिट के लिए ऊर्जा शुल्क 7.17 रुपये प्रति यूनिट की दर से 537.75 रुपये होगा। इस पर 6% बिजली शुल्क यानी 32.27 रुपये और 2 किलोवाट लोड के लिए 160 रुपये का फिक्स्ड चार्ज भी लगेगा, जिससे कुल बिल 730.02 रुपये हो जाएगा।
सरकार द्वारा 75 यूनिट के लिए दी जाने वाली 247.50 रुपये की सब्सिडी समायोजित होने के बाद, उपभोक्ता को 482.52 रुपये का भुगतान करना होगा।
बिलिंग सिस्टम में नई तकनीक और पुराने बकाए का समायोजन
बिजली बिलिंग प्रणाली को बेहतर बनाने और एकीकृत करने के प्रयासों के तहत, विभाग ने पहले के एनआईसी और एसएपी बिलिंग सॉफ्टवेयर को राजस्व प्रबंधन प्रणाली (RMS) से बदल दिया है। विभाग के अनुसार, नई प्रणाली को लागू करते समय कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आईं, जिन्हें अब सुलझाया जा रहा है।
इन तकनीकी समस्याओं के कारण, जून और जुलाई 2026 के दौरान कुछ शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के बिलों में फिक्स्ड चार्ज समायोजित नहीं हो पाया था, जिनकी मासिक खपत 125 यूनिट से अधिक थी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि के दौरान किसी भी उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन इस वजह से नहीं काटा गया।
तकनीकी समस्या के समाधान के बाद, जून और जुलाई के लंबित फिक्स्ड चार्ज को अगस्त 2026 के बिजली बिलों में एक बार के समायोजन के रूप में जोड़ दिया गया। विभाग ने बताया कि यह समायोजन निर्धारित टैरिफ के अनुसार किया गया है और उपभोक्ताओं से लागू लंबित फिक्स्ड चार्ज के अलावा कोई अतिरिक्त राशि नहीं ली गई है।
लाखों उपभोक्ताओं को मिली राहत, SMS से दी जा रही जानकारी
बिहार में लगभग 95 लाख उपभोक्ताओं के परिसर में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। इनमें से, जून और जुलाई 2026 के लिए लगभग 54.95 करोड़ रुपये का लंबित फिक्स्ड चार्ज 9,48,652 उपभोक्ताओं पर लागू था। अगस्त में प्रभावित उपभोक्ताओं के प्रीपेड बैलेंस से लंबित राशि का समायोजन कर दिया गया।
उपभोक्ताओं को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबरों पर एसएमएस भेजकर इस एक बार के समायोजन के बारे में भी सूचित किया जा रहा है।
विभाग ने बताया कि उपभोक्ता अपने बिजली बिलों में की गई कटौतियों का विस्तृत विवरण देख सकते हैं। जिन उपभोक्ताओं को अपने बिलों या एक बार के समायोजन के संबंध में शिकायतें या स्पष्टीकरण चाहिए, वे जानकारी और समाधान के लिए टोल-फ्री नंबर 1912 पर संपर्क कर सकते हैं।
बिजली विभाग के इन कदमों से न केवल बिलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी अपने बिलों को समझने और किसी भी समस्या का समाधान प्राप्त करने में आसानी होगी। यह पहल राज्य में बिजली सेवाओं को और अधिक उपभोक्ता-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
125 यूनिट से ज़्यादा बिजली खपत पर क्या होगा?
अगर किसी घर में 125 यूनिट से केवल एक यूनिट ज़्यादा यानी कुल 126 यूनिट बिजली खर्च होती है, तो पहले 125 यूनिट मुफ्त रहेंगी। इसके बाद की अतिरिक्त यूनिट पर सरकार की मौजूदा सब्सिडी वाली दरें लागू होंगी। इस एक अतिरिक्त यूनिट पर बिजली कर भी देना होगा, साथ ही पूरा बिल फिक्स्ड चार्ज के साथ आएगा। यह फिक्स्ड चार्ज इस्तेमाल किए गए लोड या स्वीकृत लोड में से जो भी ज़्यादा होगा, उसके 75 फीसदी के हिसाब से तय किया जाएगा।
यह महत्वपूर्ण है कि 125 यूनिट की मुफ्त सीमा सीधे हर बिल में तय नहीं होगी, बल्कि यह बिल के दिनों के हिसाब से समायोजित की जाएगी। सामान्यतः, 30 दिन के बिल पर 125 यूनिट मुफ्त मिलती हैं, जिसका मतलब है कि प्रतिदिन लगभग 4.16 यूनिट मुफ्त बिजली मिलेगी। उदाहरण के लिए, यदि बिल 40 दिनों का है, तो लगभग 167 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी, जबकि 25 दिन के बिल पर करीब 104 यूनिट तक बिजली मुफ्त होगी।
जानें किस श्रेणी के उपभोक्ता को कितना देना होगा?
125 यूनिट से अधिक बिजली उपयोग करने वालों को भी सरकारी राहत से पूरी तरह बाहर नहीं किया गया है। राज्य की मौजूदा बिजली सब्सिडी योजना आगे भी जारी रहेगी। कुटीर ज्योति यानी BPL परिवार और ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दर 7.42 रुपये प्रति kWh है, जिसमें सरकार 4.97 रुपये प्रति यूनिट की सब्सिडी देती है। ऐसे में, 125 यूनिट से ज़्यादा खपत पर इन उपभोक्ताओं को प्रभावी तौर पर 2.45 रुपये प्रति यूनिट का भुगतान करना होगा।
शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दर 8.95 से 9.03 रुपये प्रति यूनिट है, जिस पर सरकार क्रमशः 3.43 और 3.61 रुपये प्रति यूनिट की सब्सिडी देती है। इसलिए, 125 यूनिट से ज़्यादा खपत पर शहरी उपभोक्ताओं को 5.52 से 5.42 रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना होगा। विभिन्न उपभोक्ता श्रेणियों के लिए बिल के नियम इस प्रकार हैं:
| उपभोक्ता श्रेणी | 0-125 यूनिट तक बिल | 125 यूनिट से अधिक खपत पर फिक्स्ड चार्ज | 125 यूनिट से अधिक खपत पर प्रति यूनिट दर |
|---|---|---|---|
| कुटीर ज्योति (BPL) | शून्य | 20 रुपये प्रति कनेक्शन | 2.45 रुपये प्रति यूनिट |
| घरेलू-1 ग्रामीण | मुफ्त | 40 रुपये प्रति किलोवाट | 2.45 रुपये प्रति यूनिट |
| घरेलू-2 शहरी | मुफ्त | 80 रुपये प्रति किलोवाट | 5.52 रुपये प्रति यूनिट |
| घरेलू-3 शहरी | मुफ्त | 80 रुपये प्रति किलोवाट | 5.42 रुपये प्रति यूनिट |
यह तालिका स्पष्ट करती है कि 125 यूनिट से अधिक खपत पर भी उपभोक्ताओं को सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी का लाभ जारी रहेगा, जिससे उनका बिल काफी कम आएगा।
सोलर पैनल और किराएदारों के लिए क्या हैं नियम?
मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना का लाभ सभी घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगा, चाहे उन्होंने सोलर पैनल लगवाया हो या नहीं। यदि कोई उपभोक्ता सोलर प्लांट नहीं लगाता है, तो भी उसका लाभ बंद नहीं होगा। हालांकि, सरकार ऐसे उपभोक्ताओं को अगले तीन साल के भीतर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए प्रोत्साहित करेगी और इसके लिए सहमति के आधार पर अलग व्यवस्था भी तैयार की जाएगी। यदि 1.1 किलोवॉट का सौर ऊर्जा संयंत्र सही ढंग से काम करे, तो वह हर महीने लगभग 125 यूनिट बिजली पैदा कर सकता है।
जिन उपभोक्ताओं ने पहले से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगा रखा है, उन्हें भी इस योजना का फायदा मिलेगा। ऐसे मामलों में, बिजली कंपनी से ली गई बिजली (Import) में से बिजली कंपनी को वापस दी गई बिजली (Export) घटाई जाएगी। बची हुई यूनिट्स में से 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ दिया जाएगा। यह योजना सिर्फ ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार के ग्रामीण और शहरी दोनों घरेलू उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलेगा।
किराएदारों के लिए भी यह योजना फायदेमंद है। यदि किसी निजी मकान में कई किराएदार रहते हैं और उनके पास अलग-अलग वैध मीटर कनेक्शन हैं, तो हर वैध उपभोक्ता को योजना का लाभ मिल सकता है। इसके लिए किराएदार का SBPDCL या NBPDCL का वैध बिजली उपभोक्ता होना ज़रूरी है। उपभोक्ताओं को यह हिसाब लगाने की ज़रूरत नहीं होगी कि सरकार ने कितनी राहत दी है, क्योंकि बिजली बिल में ‘राज्य सरकार का अनुदान’ नाम से सब्सिडी की जानकारी स्पष्ट रूप से दर्शायी जाएगी, जिसमें 125 यूनिट तक मिलने वाली पूरी सब्सिडी शामिल होगी।








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