Darbhanga Diversion: दरभंगा जिले के जाले प्रखंड स्थित खनुआ घाट पर एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. अधवारा समूह की खिरोई नदी पर बन रहे उच्च स्तरीय आरसीसी पुल के लिए बनाया गया डायवर्सन तेज बारिश के बाद जलमग्न हो गया है. 17 जुलाई की रात हुई भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने से यह स्थिति उत्पन्न हुई, जिसके चलते 18 जुलाई की सुबह से इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है. इस घटना से एक दर्जन से अधिक गांवों के निवासियों के सामने आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.







बारिश ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुसीबत
खनुआ घाट पर Darbhanga Diversion के डूबने से मस्सा, धनकौल, मिर्जापुर, करवा और मदिलमन जैसे गांवों का सीधा संपर्क प्रखंड मुख्यालय, कमतौल बाजार और मुरैठा फ्लैग स्टेशन से टूट गया है. अब इन गांवों के लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए शाहपुर-शिवनगर या मकिया जैसे वैकल्पिक मार्गों से लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है. यह समस्या निर्माण एजेंसी की कथित लापरवाही के कारण और भी गंभीर हो गई है, क्योंकि ग्रामीणों का कहना है कि पहले से मौजूद एक उपयोगी स्क्रूपाइल पुल को तोड़ दिया गया था, लेकिन नए पुल का निर्माण कार्य अभी तक शुरू भी नहीं हुआ है.
निर्माण एजेंसी पर लापरवाही के गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि आवागमन के लिए नदी में मिट्टी डालकर बनाया गया यह डायवर्सन पहली ही बारिश में बह गया था. आठ जुलाई को दो ह्यूम पाइप लगाकर इसकी मरम्मत की गई थी, जिसके बाद आवागमन कुछ समय के लिए बहाल हो गया था. लेकिन 17 जुलाई की रात हुई बारिश ने इसे दोबारा जलमग्न कर दिया, जिससे क्षेत्र में फिर से कनेक्टिविटी का संकट गहरा गया है.

सामाजिक कार्यकर्ता सुदिष्ट ठाकुर ने इस संबंध में बताया, ‘पुराना पुल चालू हालत में था, फिर भी उसे ध्वस्त कर दिया गया.’ वहीं, संजय प्रसाद, मुखिया पति नागेश्वर मुखिया और भूषण प्रसाद ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ‘यदि डायवर्सन में पानी निकासी के लिए पर्याप्त ह्यूम पाइप लगाए गए होते तो यह स्थिति बनती ही नहीं.’
ग्रामीणों ने विभाग और संवेदक पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए इस समस्या का जल्द से जल्द स्थायी समाधान करने की मांग की है. यह मार्ग मधुबनी जिले के बेनीपट्टी थाना क्षेत्र के शाहपुर, शिवनगर को सीतामढ़ी-मधुबनी एसएच-52 से भी जोड़ता है, जिससे इसकी महत्ता और बढ़ जाती है.
स्थायी समाधान की मांग तेज
बार-बार डायवर्सन के डूबने से स्थानीय लोगों में आक्रोश है. वे चाहते हैं कि निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग इस समस्या का स्थायी समाधान निकाले, ताकि उन्हें हर बारिश में इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द कोई ठोस कदम उठाया जाए जिससे उनकी दैनिक दिनचर्या सामान्य हो सके.










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