
Darbhanga Manuscripts: दरभंगा की धरती ने फिर उगली है अपने अतीत की अमूल्य धरोहरें! जी हां, कोसी-मिथिलांचल के इस ऐतिहासिक जिले में 300 साल से भी पुराना इतिहास अब 24 हजार से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों के माध्यम से सामने आ रहा है। जिला प्रशासन इन अनमोल विरासतों को सहेजने में जुटा है, जिससे आने वाली पीढ़ियां अपने समृद्ध अतीत से रूबरू हो सकें।
Darbhanga Manuscripts: डीएम ने दिए तेजी से खोज के निर्देश
दरभंगा, 28 अप्रैल 2026: जिलाधिकारी कौशल कुमार ने अधिकारियों को प्राचीन पांडुलिपियों की खोज और सत्यापन अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस कार्य की गुणवत्ता सुधारने, बेहतर निगरानी करने और जन जागरूकता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए।
जिलाधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि इन अनमोल विरासतों के संरक्षण में आम नागरिकों को भी आगे आना चाहिए, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियों को इतिहास की बेहतर जानकारी मिल सके। जिले में अब तक सत्यापित पांडुलिपियों की संख्या 24,139 से अधिक हो गई है, जो दरभंगा के गौरवशाली अतीत को दर्शाती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
अमूल्य पांडुलिपियों की खोज और ज्ञान भारतम् मिशन
ज्ञान भारतम् मिशन के तहत पांडुलिपियों के सर्वेक्षण के क्रम में मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को दरभंगा जिले में पांडुलिपि खोज से संबंधित एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी चंदन कुमार ने राघोपुर ड्योढ़ी स्थित हरिनंदन सिंह मेमोरियल ट्रस्ट में संरक्षित पांडुलिपियों का गहन अवलोकन किया। इस दौरान ट्रस्ट के संचालक रामदत्त सिंह (अधिवक्ता) ने इन पांडुलिपियों की वर्तमान स्थिति और ऐतिहासिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी। इस अवलोकन के दौरान कई बेहद दुर्लभ और प्राचीन रचनाएं प्राप्त हुईं, जिनमें लगभग 400 वर्ष पुरानी ‘अचारादर्श’, लगभग 500 वर्ष पुरानी ‘काव्य प्रकाशिका’ और ताड़पत्र पर हस्तलिखित ‘अमरकोष’ पर टीका ग्रंथ शामिल हैं। इन अमूल्य Darbhanga Manuscripts के माध्यम से दरभंगा के समृद्ध इतिहास और पौराणिक परंपराओं को एक नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्राप्त हुआ है। भारत सरकार एवं राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयास से संचालित ज्ञान भारतम् मिशन का उद्देश्य 75 वर्ष से अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों का डिजिटाइजेशन, संरक्षण और सर्वेक्षण करना है, ताकि शोधार्थियों को विभिन्न विषयों पर मूल ग्रंथों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके। जिलाधिकारी के नेतृत्व में इस मिशन को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा रहा है, जो जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
जनता से सहयोग की अपील
जिलाधिकारी कौशल कुमार ने पांडुलिपियों के संरक्षण एवं सर्वेक्षण को लेकर आम जनता से विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि जिन घरों में 75 वर्ष से अधिक पुरानी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं आध्यात्मिक महत्व की पांडुलिपियां सुरक्षित हैं, उन्हें ‘ज्ञान भारतम्’ पोर्टल पर साझा करें। उन्होंने यह भी बताया कि अक्सर घरों में पुराने कागजात संदूकों में पड़े रहते हैं, जिनका महत्व लोग नहीं समझ पाते, जबकि वे इतिहास के महत्वपूर्ण दस्तावेज हो सकते हैं। इन पांडुलिपियों के अध्ययन से अनेक ऐसे तथ्य सामने आते हैं, जो अब तक अपुष्ट रहे हैं, लेकिन ये दस्तावेज उन्हें प्रमाणित करने में सहायक सिद्ध होते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी द्वारा जिलाधिकारी के निर्देशानुसार जिले में सरकारी, गैर-सरकारी एवं निजी संरक्षण में उपलब्ध पांडुलिपियों का व्यापक सर्वेक्षण कराया जा रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







