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बांकीपुर उपचुनाव: ‘बेटे ने इज्जत बचाने के लिए नाम वापस लिया’, पिता के दावे से सियासी गलियारों में हड़कंप!

Bankipur By-election: पटना के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से भाजपा प्रत्याशी अभिषेक कुमार बंटी के नाम वापस लेने के बाद उनके पिता रवींद्र प्रसाद ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि बेटे ने परिवार की इज्जत बचाने के लिए यह फैसला लिया, जिसे उन्होंने 'साजिश' करार दिया।

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Bankipur By-election: पटना के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से भाजपा प्रत्याशी अभिषेक कुमार बंटी के नाम वापस लेने के बाद उनके पिता रवींद्र प्रसाद ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि बेटे ने परिवार की इज्जत बचाने के लिए नामांकन वापस लिया है। रवींद्र प्रसाद ने इस घटनाक्रम को “साजिश” करार दिया, हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। यह पूरा मामला उनके माता-पिता से जुड़े चारा घोटाला मामलों पर फिर से ध्यान केंद्रित होने के बाद सामने आया है।

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बांकीपुर उपचुनाव में बड़ा उलटफेर! भाजपा प्रत्याशी के पिता का चौंकाने वाला दावा, क्या थी नाम वापसी की असली वजह?

Bankipur By-election: बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से भाजपा प्रत्याशी अभिषेक कुमार बंटी के नाम वापस लेने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। उनके पिता रविंद्र प्रसाद ने दावा किया है कि बेटे ने परिवार की ‘इज्जत बचाने’ के लिए यह कदम उठाया है, क्योंकि चारा घोटाला से जुड़े उनके पुराने मामलों को फिर से सार्वजनिक बहस में लाया जा रहा था। रविंद्र प्रसाद ने इस घटनाक्रम को एक ‘साजिश’ करार दिया, हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया।

‘यह परिवार की इज्जत बचाने का फैसला था’

रविंद्र प्रसाद ने एक क्षेत्रीय डिजिटल मीडिया आउटलेट से बात करते हुए कहा, “बेटे ने परिवार की इज्जत और पार्टी की छवि बचाने के लिए अपना नामांकन वापस ले लिया।” उन्होंने बताया कि अभिषेक ने यह फैसला तब लिया जब उन्हें पता चला कि उनके माता-पिता से जुड़े आपराधिक मामलों पर राजनीतिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परिवार इस घटनाक्रम से बेहद दुखी है। रविंद्र प्रसाद ने यह भी बताया कि अभिषेक दो दशकों से अधिक समय से भाजपा के लिए काम कर रहे थे और उनके नामांकन के बाद परिवार में जश्न का माहौल था, जो अब दुख में बदल गया है।

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चारा घोटाला मामला और राजनीतिक विवाद

रविंद्र प्रसाद ने स्पष्ट किया कि उनके और उनकी पत्नी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पहले ही समाप्त हो चुकी है। उन्होंने बताया कि दोनों ने अपनी सजा को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है और वर्तमान में जमानत पर हैं। उन्होंने उन मीडिया रिपोर्टों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया था कि मामला सैकड़ों करोड़ रुपये का था, उनका दावा है कि आरोप लगभग 11 लाख रुपये की निकासी से संबंधित थे। प्रसाद ने कहा कि उनका परिवार गलत आंकड़े प्रकाशित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार करेगा।

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अभिषेक कुमार, जो भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके हैं, लगभग दो दशकों से भाजपा से जुड़े हुए हैं। उन्हें बांकीपुर के पूर्व विधायक नितिन नवीन का करीबी माना जाता है। उनके नामांकन की घोषणा के बाद, विपक्षी दल उनके परिवार के कानूनी इतिहास को उपचुनाव अभियान के दौरान मुद्दा बनाने की तैयारी कर रहे थे।

भाजपा की चुप्पी और आगे का रास्ता

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि अभिषेक के माता-पिता की सजा से जुड़ा विवाद पार्टी के भीतर चिंता का विषय बन गया था। हालांकि, भाजपा ने सार्वजनिक रूप से अभिषेक कुमार को बदलने के पीछे के कारणों की पुष्टि नहीं की है। पार्टी ने केवल यह कहा है कि नीरज कुमार सिन्हा का नामांकन एक संगठनात्मक निर्णय था। अभिषेक के नाम वापस लेने के 72 घंटे के भीतर ही भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा को अपना नया उम्मीदवार घोषित कर दिया था।

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अब बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। इस घटनाक्रम ने चुनाव में नया मोड़ ला दिया है और आने वाले समय में इसके राजनीतिक निहितार्थ सामने आएंगे।

‘बेटे ने परिवार की इज्जत और पार्टी की छवि बचाने के लिए नाम वापस लिया’

रवींद्र प्रसाद के अनुसार, अभिषेक ने यह फैसला तब लिया जब उन्हें पता चला कि उनके माता-पिता के आपराधिक मामलों पर राजनीतिक ध्यान केंद्रित हो गया है। उन्होंने कहा, “मेरे बेटे ने हमारे सम्मान और पार्टी की छवि की रक्षा के लिए अपना नामांकन वापस ले लिया।” उन्होंने बताया कि परिवार इस घटनाक्रम से बहुत दुखी है। अभिषेक ने भाजपा के लिए दो दशकों से अधिक समय तक काम किया था और उनके नामांकन से परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन अब दुख छा गया है।

चारा घोटाला मामले को लेकर परिवार का पक्ष

रवींद्र प्रसाद ने बताया कि उनके और उनकी पत्नी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पहले ही समाप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि दोनों ने उच्च न्यायालय में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती दी है और वर्तमान में जमानत पर हैं। उन्होंने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि मामला करोड़ों रुपये का है। उनके अनुसार, उन पर लगभग 11 लाख रुपये की निकासी से संबंधित आरोप थे। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार गलत आंकड़े प्रकाशित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार करेगा।

रवींद्र प्रसाद, मैसर्स मगध केमिकल्स कॉर्पोरेशन के पूर्व प्रबंधक, और उनकी पत्नी चंचला सिन्हा, जो कंपनी से जुड़ी थीं, केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा चारा घोटाले से जुड़े मामलों में अभियोजित किए गए थे। अदालत के रिकॉर्ड बताते हैं कि दोनों को चारा घोटाले से संबंधित मामलों में दोषी ठहराया गया था। हालांकि, कानूनी कार्यवाही में वर्षों से विभिन्न परिणाम वाले कई मामले शामिल थे। पहले के अदालती फैसलों में कुछ मामलों में दोषसिद्धि शामिल है, जबकि चंचला सिन्हा को अलग डोरंडा कोषागार मामले में बरी कर दिया गया था।

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बांकीपुर उपचुनाव: भाजपा पर उठे सवाल

अभिषेक कुमार, भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष, लगभग दो दशकों से भाजपा से जुड़े हुए हैं और उन्हें बांकीपुर के पूर्व विधायक नितिन नवीन का करीबी माना जाता है। उनके नामांकन की घोषणा के बाद, विपक्षी दलों ने उनके परिवार के कानूनी इतिहास पर सवाल उठाए थे और उपचुनाव अभियान के दौरान इस मुद्दे को उठाने की तैयारी कर रहे थे। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि उनके माता-पिता की दोषसिद्धि से जुड़ा विवाद पार्टी के भीतर चिंता का विषय बन गया था। हालांकि, भाजपा ने अभिषेक कुमार को बदलने के पीछे के कारणों की सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की है।

भाजपा ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है कि अभिषेक कुमार की उम्मीदवारी क्यों वापस ली गई। पार्टी ने कहा है कि नीरज कुमार सिन्हा का नामांकन एक संगठनात्मक निर्णय था। उम्मीदवार बदलने के बाद, बांकीपुर उपचुनाव में अब भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के बीच मुकाबला होगा।

बांकीपुर उपचुनाव में उम्मीदवार बदलने का यह फैसला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। भाजपा के इस कदम के पीछे के वास्तविक कारणों पर अभी भी रहस्य बरकरार है, लेकिन इसने निश्चित रूप से चुनाव की रणनीति और नतीजों पर असर डाला है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह घटनाक्रम मतदान को किस तरह प्रभावित करता है।

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