Bihar Building Rules: बिहार में अपना घर या अपार्टमेंट बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब भवन निर्माण की मंजूरी के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राज्य सरकार ‘बिहार बिल्डिंग बायलॉज-2026’ लागू करने की तैयारी में है, जिसका ड्राफ्ट अब अंतिम चरण में है। इस नए नियम से रिश्वतखोरी और लंबी प्रक्रियाओं से भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
नए नियमों के लागू होने के बाद भवन निर्माण की मंजूरी प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी। विशेष जोर ऑनलाइन व्यवस्था पर दिया गया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और काम में तेजी आएगी।

24 मीटर तक के भवनों को तुरंत मंजूरी, ‘सेल्फ सर्टिफिकेशन’ से बड़ी राहत
नई व्यवस्था के तहत, 24 मीटर यानी लगभग आठ मंजिला तक के आवासीय भवनों का नक्शा ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करते ही स्वतः पास मान लिया जाएगा। इसे ‘सेल्फ सर्टिफिकेशन’ व्यवस्था का नाम दिया गया है। इस कदम से छोटे और सामान्य आवासीय भवनों के लिए मंजूरी की प्रक्रिया पहले के मुकाबले बेहद सरल हो जाएगी, जिससे आम लोगों को सीधे फायदा मिलेगा।
जोखिम आधारित श्रेणियां: जानिए आपके भवन के लिए क्या हैं नए नियम?
नए बिल्डिंग बायलॉज में भवनों को उनके जोखिम के आधार पर तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। हर श्रेणी के लिए मंजूरी की प्रक्रिया भी अलग होगी।
- निम्न जोखिम: 24 मीटर तक के आवासीय भवन और 15 मीटर तक के व्यावसायिक भवनों को ‘सेल्फ सर्टिफिकेशन’ के माध्यम से तुरंत मंजूरी मिल जाएगी। इन भवनों के लिए अलग से फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) की आवश्यकता नहीं होगी।
- मध्यम जोखिम: 16 मंजिल तक के भवनों की मंजूरी नगर निकाय के पैनल में शामिल ‘थर्ड पार्टी आर्किटेक्ट’ द्वारा दी जाएगी।
- उच्च जोखिम: 50 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतें और बड़े कॉमर्शियल प्रोजेक्ट्स की गहन जांच ‘सक्षम अधिकारी’ करेंगे।
30 दिन में फैसला नहीं तो नक्शा स्वतः पास, पार्किंग और आर्किटेक्ट पर भी सख्ती
यह भी तय किया गया है कि अगर किसी नक्शे के आवेदन पर अधिकारी 30 दिनों के भीतर कोई फैसला नहीं लेते हैं, तो उसे स्वतः स्वीकृत मान लिया जाएगा। इससे अनावश्यक देरी पर अंकुश लगेगा। इसके अलावा, नक्शा पास कराने, एनओसी लेने और सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए एक ‘डिजिटल सिंगल विंडो सिस्टम’ भी तैयार किया जाएगा, जिससे विभिन्न विभागों के चक्कर लगाने की जरूरत खत्म हो जाएगी।
नए नियमों में अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) खरीदने की सुविधा भी दी जाएगी। लोग तय शुल्क का भुगतान करके अपनी जरूरत के अनुसार अतिरिक्त एफएआर प्राप्त कर सकेंगे। बिल्डिंग प्लान स्वीकृत होते ही संबंधित जमीन का ‘लैंड यूज’ में बदलाव भी स्वतः स्वीकृत हो जाएगा।
पार्किंग को लेकर भी सरकार सख्त रुख अपना रही है। भवनों में तय मानकों के अनुसार इन-हाउस पार्किंग रखना अनिवार्य होगा। यदि किसी इमारत के बाहर सड़क पर वाहन पार्क किए हुए पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी पूरी बिल्डिंग को सील कर सकेंगे। गलत नक्शा पास करने वाले आर्किटेक्ट के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के साथ उन्हें ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा।
सरकार का मुख्य उद्देश्य भवन निर्माण की मंजूरी प्रक्रिया को आसान, तेज और डिजिटल बनाना है, ताकि आम लोगों को दफ्तरों की भागदौड़ से मुक्ति मिल सके और निर्माण कार्य में तेजी आए।







