Bihar Museum: पटना स्थित बिहार म्यूजियम और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय (IGRMS) के बीच संस्कृति और विरासत के संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। दोनों संस्थानों ने पांच साल के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य संग्रहालय विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और सार्वजनिक सहभागिता को बढ़ावा देना है। इस पहल से भारत की समृद्ध लोक और जनजातीय विरासत को सहेजने और उसे जन-जन तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
कला और संस्कृति का होगा आदान-प्रदान
इस करार के तहत, दोनों संग्रहालय संयुक्त प्रदर्शनियों, संग्रहालय कलाकृतियों और प्रदर्शनी संसाधनों के आदान-प्रदान पर सहयोग करेंगे। इसके साथ ही, लोक और जनजातीय कला तथा संस्कृति के संरक्षण, दस्तावेज़ीकरण और अनुसंधान पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि यह साझेदारी ज्ञान, विशेषज्ञता और संस्थागत संसाधनों के बेहतर आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेगी।






बिहार म्यूजियम के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने कहा, “यह साझेदारी भारत के संग्रहालयों के बीच ज्ञान, अनुभव और संसाधनों के आदान-प्रदान को नई गति प्रदान करेगी। इससे देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित और बढ़ावा देने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।”
डिजिटल नवाचार से बढ़ेगी पहुंच
समझौते में डिजिटल नवाचार पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत डिजिटल अभिलेखागार, दृश्य प्रदर्शनियां, डिजिटल कैटलॉग और संवर्धित वास्तविकता (AR) व आभासी वास्तविकता (VR) आधारित संग्रहालय अनुभव विकसित करने की योजना है। दोनों संस्थान पारंपरिक शिल्पों, सांस्कृतिक नवाचार और समुदाय-आधारित कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगे। इसके अलावा, संग्रहालय विज्ञान के छात्रों के लिए शैक्षिक गतिविधियों, इंटर्नशिप और प्रशिक्षण के अवसर भी बढ़ाए जाएंगे।
जनभागीदारी और जागरूकता पर जोर
बिहार म्यूजियम और IGRMS संयुक्त रूप से अनुसंधान परियोजनाओं, व्याख्यानों, चर्चाओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक आउटरीच कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। इन आयोजनों का मुख्य लक्ष्य भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। IGRMS, भोपाल के निदेशक प्रोफेसर अमिताभ पांडे और बिहार म्यूजियम के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे देश की सांस्कृतिक धरोहर को एक नया आयाम मिलेगा।
यह समझौता सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे आने वाली पीढ़ियां भारत की समृद्ध परंपराओं से जुड़ सकेंगी। उम्मीद है कि यह सहयोग भविष्य में अन्य संग्रहालयों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।








