दिल्ली से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे बॉलीवुड को भावुक कर दिया है। दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के निधन के बाद, अब उनकी दूसरी पत्नी हेमा मालिनी और बेटियों ने राजधानी में एक विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया, जहां कुछ ऐसी तस्वीरें दिखीं, जिसने सभी का ध्यान खींचा। आखिर क्या था वो नजारा, जिसने रिश्तों की डोर को एक बार फिर मजबूती से बांध दिया?
बॉलीवुड के ‘हीमैन’ कहे जाने वाले अभिनेता धर्मेंद्र के निधन से पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके करोड़ों प्रशंसक गहरे शोक में डूब गए हैं। 89 वर्ष की आयु में 24 नवंबर को इस दुनिया को अलविदा कहने वाले धर्मेंद्र, 8 दिसंबर को अपना 90वां जन्मदिन मनाने वाले थे। मुंबई में परिवार और फिल्म जगत की कई हस्तियों ने उनकी याद में एक प्रार्थना सभा आयोजित की थी। अब इसी कड़ी में, दिल्ली में भी उनके लिए एक विशेष प्रार्थना सभा रखी गई है।






यह प्रार्थना सभा धर्मेंद्र की दूसरी पत्नी हेमा मालिनी और उनकी बेटियों, ईशा देओल व अहाना देओल द्वारा आयोजित की गई है। 11 दिसंबर को दिल्ली के जनपथ स्थित अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में शाम 4 बजे से 6 बजे तक यह आयोजन हुआ, जिसमें परिवार के सदस्यों और करीबी लोगों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
दिल्ली में भावुक पल, परिवार ने दी श्रद्धांजलि
इस भावुक अवसर पर सबसे खास बात यह रही कि ईशा देओल के पूर्व पति भरत तख्तानी भी उनके साथ नज़र आए। प्रार्थना सभा के आमंत्रण पत्र में हेमा मालिनी, ईशा और अहाना के साथ भरत तख्तानी का नाम भी प्रमुखता से शामिल किया गया था। अहाना के पति वैभव वोहरा भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे। धर्मेंद्र के निधन के बाद हेमा मालिनी और ईशा देओल बेहद टूट गई थीं, और ऐसे मुश्किल दौर में भरत लगातार उनके साथ खड़े रहे हैं। वे धर्मेंद्र से मिलने अस्पताल भी गए थे।
बता दें कि ईशा देओल और भरत तख्तानी ने इसी वर्ष 2024 में अपने अलग होने की घोषणा कर सभी को चौंका दिया था। यह कपल 2012 में शादी के बंधन में बंधा था और उनकी दो बेटियां – राध्या और मिराया हैं, जिनकी परवरिश अब ईशा कर रही हैं। उनके तलाक की खबर ने सभी को हैरान कर दिया था, और इस घोषणा के बाद भरत अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके थे।
ईशा देओल के मुश्किल वक्त में पूर्व पति का साथ
हालांकि, इस कठिन समय में भरत का ईशा और उनके परिवार के प्रति समर्थन, उनके मजबूत मानवीय संबंधों को दर्शाता है। यह दिखाता है कि रिश्ते भले ही कानूनी तौर पर बदल जाएं, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव और एक-दूसरे के प्रति सहयोग की भावना हमेशा बनी रह सकती है, खासकर जब बात परिवार के किसी बड़े सदस्य के निधन जैसे दुखद मौके की हो।








