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कोशी नदी उफनाई, नेपाल ने बहकाया, आया जलप्रवाह का 1.63 लाख क्यूसेक का विकराल रूप! 21 फाटक खुले, बिहार में बाढ़ की आहट?

Bihar Flood: नेपाल में भारी बारिश के बाद कोशी बैराज पर जलप्रवाह डेढ़ लाख क्यूसेक पार कर गया है। सुनसरी में 21 फाटक खोल दिए गए हैं, जिससे भारत और नेपाल के निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है।

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Bihar Flood: नेपाल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कोशी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे बिहार में संभावित बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। आज सुबह जलप्रवाह 1 लाख 63 हजार क्यूसेक से अधिक होने के बाद प्रशासन ने कोशी बैराज के 21 फाटक खोल दिए हैं। यह कदम नदी के बढ़ते दबाव को कम करने और निचले तटीय क्षेत्रों को बचाने के लिए उठाया गया है।

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कोशी नदी ने बढ़ाई बिहार की धड़कनें! बैराज के 21 फाटक खुले, क्या आएगी बाढ़?

Koshi River Flood: नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश के बाद कोशी नदी का जलस्तर भयावह रूप से बढ़ गया है। आज 16 जुलाई की सुबह कोशी बैराज पर नदी का जलप्रवाह 1 लाख 63 हजार 230 क्यूसेक दर्ज किया गया, जो सामान्य से कहीं अधिक है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से कोशी बैराज के कुल 56 फाटकों में से 21 फाटक खोल दिए हैं। इस कदम से भारत के निचले तटीय क्षेत्रों, विशेषकर बिहार में बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ गया है।

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क्यों बढ़ा कोशी नदी का जलस्तर?

कोशी नदी के जलस्तर में यह अप्रत्याशित वृद्धि मुख्य रूप से नेपाल के पूर्वी हिस्सों में हो रही मूसलाधार बारिश का परिणाम है। मानसून के दौरान तमोर, अरुण, सुनकोशी, दूधकोशी, तामाकोशी, भोटेकोशी और इन्द्रावती जैसी प्रमुख सहायक नदियों का पानी कोशी में मिलने से इसका प्रवाह तेजी से बढ़ जाता है। पुलिस उपाधीक्षक चन्द्रबहादुर खड़का ने बताया है कि यदि पूर्वी नेपाल में बारिश जारी रहती है, तो नदी का जलस्तर और भी खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है। शुष्क मौसम में नदी का प्रवाह काफी कम रहता है, लेकिन मानसून में यह विकराल रूप ले लेती है।

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क्या कहते हैं कोशी बैराज के नियम?

कोशी बैराज नियंत्रण कक्ष के अनुसार, नदी के जलप्रवाह को नियंत्रित करने और खतरे की चेतावनी देने के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं। जब नदी का जलप्रवाह 1 लाख 50 हजार क्यूसेक से अधिक हो जाता है, तो संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए तत्काल लाल चेतावनी बत्तियां जला दी जाती हैं और लाल झंडे फहरा दिए जाते हैं। यह संकेत निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क करने के लिए होता है। कोशी बैराज में कुल 56 फाटक हैं, जिनमें 52 मुख्य फाटक और चार नहर फाटक शामिल हैं। आज सुबह 21 फाटकों को खोलना मौजूदा खतरे की गंभीरता को दर्शाता है।

“गुरुवार सुबह तक कोशी बैराज पर नदी का जलप्रवाह 1 लाख 63 हजार 230 क्यूसेक दर्ज किया गया। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि पूर्वी नेपाल में लगातार वर्षा जारी रही तो नदी का जलस्तर और बढ़ सकता है।”

कोशी नदी का यह बढ़ता जलस्तर न केवल नेपाल बल्कि भारत के उन सभी निचले तटीय क्षेत्रों के लिए चिंता का विषय है, जो कोशी की बाढ़ से प्रभावित होते रहे हैं। प्रशासन द्वारा फाटकों को खोलना एक आवश्यक कदम है, लेकिन यह इस बात का भी संकेत है कि आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी की जाने वाली किसी भी सलाह का पालन करने की आवश्यकता है। पढ़िए विस्तार से

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कोशी बैराज पर जलस्तर 1.63 लाख क्यूसेक पार, 21 गेट खुले

गुरुवार सुबह तक कोशी बैराज पर नदी का जलप्रवाह 1 लाख 63 हजार 230 क्यूसेक दर्ज किया गया। सुनसरी के पुलिस उपाधीक्षक चन्द्रबहादुर खड़का ने इस आंकड़े की पुष्टि की। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि पूर्वी नेपाल में बारिश का सिलसिला जारी रहता है, तो नदी का जलस्तर और अधिक बढ़ सकता है। हालात को नियंत्रित करने के लिए कोशी बैराज के कुल 56 फाटकों में से 21 फाटकों को खोल दिया गया है। बैराज में 52 मुख्य फाटक और 4 नहर फाटक शामिल हैं।

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मानसून में उफान पर रहती है कोशी, कई सहायक नदियां बढ़ाती हैं पानी

कोशी नदी का जलस्तर मानसून के दौरान तेजी से बढ़ता है। इसका मुख्य कारण तमोर, अरुण, सुनकोशी, दूधकोशी, तामाकोशी, भोटेकोशी और इन्द्रावती जैसी प्रमुख सहायक नदियों से मिलने वाला पानी है। शुष्क मौसम की तुलना में मानसून में इन नदियों का प्रवाह कई गुना बढ़ जाता है, जिससे कोशी में भारी मात्रा में पानी आता है। नेपाल और भारत के निचले तटीय क्षेत्रों में कोशी नदी के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ जाता है।

लाल चेतावनी बत्तियां जलीं, लाल झंडे फहराए गए

कोशी बैराज नियंत्रण कक्ष के अनुसार, नदी का जलप्रवाह जब 1 लाख 50 हजार क्यूसेक से अधिक हो जाता है, तो संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए तत्काल प्रभाव से बैराज पर लाल चेतावनी बत्तियां जला दी जाती हैं। साथ ही, खतरे के संकेत के तौर पर लाल झंडे भी फहरा दिए जाते हैं। यह प्रणाली स्थानीय आबादी और संबंधित अधिकारियों को सतर्क करने के लिए बनाई गई है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

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