Darbhanga Teacher Election: बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जदयू के उम्मीदवार डॉ. घनश्याम राय की उम्मीदवारी पर अब संशय के बादल मंडरा रहे हैं। वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप सामने आने के बाद ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) ने चुनाव लड़ने के लिए अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने से पहले राजभवन से मार्गदर्शन मांगा है। इस घटनाक्रम से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
वित्तीय अनियमितता के आरोप और विश्वविद्यालय की जांच
डॉ. घनश्याम राय पर समस्तीपुर जिले के रोसड़ा अनुमंडल स्थित जेआर कॉलेज, रोसड़ा में वर्ष 2024 से 2025 के बीच प्राचार्य रहते हुए वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे थे। इन आरोपों की जांच के लिए विश्वविद्यालय ने एक समिति का गठन किया था, जिसने अपनी रिपोर्ट ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय को सौंप दी है। हालांकि, जांच में अभी तक डॉ. राय के खिलाफ कोई आरोप तय नहीं हो सका है। विश्वविद्यालय के नियम स्पष्ट करते हैं कि चुनाव लड़ने से पहले किसी भी विश्वविद्यालय कर्मचारी को अपने संस्थान से एनओसी लेना अनिवार्य है।

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजय कुमार चौधरी ने बताया, ‘डॉ. राय के मामले में राजभवन से दिशा-निर्देश मांगा गया है। निर्देश मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।’
राजभवन से मांगा गया मार्गदर्शन, क्यों फंसा मामला?
डॉ. राय ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से एनओसी की मांग की थी। इसके जवाब में, विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार डॉ. विद्यारानी हांसदा ने 24 सितंबर को पत्रांक LNMU/CR 42/26 के माध्यम से राजभवन को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा है। उन्होंने राज्यपाल सचिवालय और मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह से भी इस संबंध में दिशा-निर्देश देने का अनुरोध किया है। वर्तमान में डॉ. राय मुंगेर विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत हैं, जबकि इससे पहले वे ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभाग में प्रोफेसर थे। यही वजह है कि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय प्रशासन उन पर सीधे कार्रवाई नहीं कर सकता और उसे राजभवन के हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी है।
सियासी हलचल और पिछले चुनाव का लेखा-जोखा
जदयू द्वारा 23 सितंबर को डॉ. घनश्याम राय को दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद से ही स्थानीय जदयू इकाई में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। फिलहाल, इस क्षेत्र से कांग्रेस नेता डॉ. मदन मोहन झा विधान परिषद के सदस्य हैं। पिछले चुनाव में एनडीए ने डॉ. सुरेश कुमार राय को उम्मीदवार बनाया था, जिन्हें डॉ. मदन मोहन झा से हार का सामना करना पड़ा था। डॉ. सुरेश राय ने 2026 के अगले चुनाव से ठीक पहले अपनी पार्टी बदलते हुए जन सुराज का दामन थाम लिया है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की निगाहें राजभवन के फैसले पर टिकी हैं। राजभवन से दिशा-निर्देश मिलने के बाद ही डॉ. घनश्याम राय की उम्मीदवारी और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की अगली कार्रवाई स्पष्ट हो पाएगी। जब तक राजभवन का निर्णय नहीं आता, डॉ. राय की उम्मीदवारी पर अनिश्चितता बनी रहेगी।

