Rabri Devi Bungalow: बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को पटना स्थित दस सर्कुलर रोड का सरकारी बंगला खाली करने के लिए दूसरा नोटिस भेज दिया गया है। भवन निर्माण विभाग ने 22 जून को यह नोटिस जारी करते हुए उन्हें एक हफ्ते के भीतर आवास खाली करने को कहा है। इस बंगले को डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया जा चुका है, लेकिन राबड़ी देवी द्वारा खाली न किए जाने के कारण उन्हें अभी तक यह उपलब्ध नहीं हो सका है।
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इससे पहले भी विभाग ने राबड़ी देवी को यह बंगला खाली करने का नोटिस दिया था। बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्हें 39 हार्डिंग रोड का बंगला पहले ही आवंटित किया जा चुका है। सरकार का तर्क है कि आवास खाली करने का नोटिस नियमों के तहत दिया गया है, जबकि विपक्ष ने इसे दुर्भावना से प्रेरित बताया था।






बंगला खाली करने को लेकर सरकार का कड़ा रुख
भवन निर्माण विभाग ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि एक सप्ताह के अंदर दस सर्कुलर रोड का बंगला खाली कर दिया जाए, ताकि आवंटित मंत्री को उनका आवास मिल सके। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने पहले इस बंगले को खाली करने से इनकार कर दिया था, हालांकि बाद में उन्होंने लिखित में 39 हार्डिंग रोड पर जाने की सहमति जताई थी। उनकी शर्त थी कि लालू प्रसाद यादव के स्वास्थ्य को देखते हुए नए आवास में रैंप और लिफ्ट जैसी विशेष व्यवस्थाएं की जाएं, जिस पर विभाग कार्रवाई कर रहा है। राबड़ी देवी 1997 से 2005 तक आठ साल बिहार की मुख्यमंत्री रही थीं।
राबड़ी देवी की नाराजगी और मंत्री लेशी सिंह का बयान
बंगला खाली करने के पहले नोटिस के बाद राबड़ी देवी ने अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि:
मैं देख सकती हूं कि हाल ही में मुख्यमंत्री बने सम्राट चौधरी काफी उत्साहित हैं। वह मुझे जबरन हटा दें। मैं यह बंगला खाली नहीं करने वाली।
हालांकि, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की वरिष्ठ नेता और भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह ने इस मामले पर सरकार का पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था कि:
राबड़ी देवी को हार्डिंग रोड स्थित 39 नंबर का बंगला कुछ समय पहले आवंटित किया जा चुका है, और वह यह नहीं कह सकतीं कि उन्हें उनको मिलने वाली सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है। हमने एक मंत्री को सर्कुलर रोड स्थित 10 नंबर का बंगला आवंटित किया है, और राबड़ी देवी किसी तरह की रियायत की उम्मीद नहीं कर सकतीं।
सीएम सम्राट चौधरी ने भी दिया सख्त संदेश
इस पूरे विवाद पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है कि सरकारी बंगलों पर नियमों का पालन अनिवार्य है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा था कि:
कुछ लोगों को बंगले का मोह हो जाता है। मां को अलग और बेटे को अलग बंगला चाहिए सरकार बंगला तो किसी भी कीमत खाली करना ही पड़ेगा।
इस दूसरे नोटिस के बाद अब देखना होगा कि राबड़ी देवी इस सरकारी आदेश का पालन कब तक करती हैं और क्या यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और गरमाएगा। सरकार का यह कदम सरकारी आवासों के आवंटन और खाली कराने के नियमों के सख्ती से पालन का संकेत देता है।







