Bihar UPSC Cadre: लाखों युवाओं का सपना होता है कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रतिष्ठित परीक्षा पास करने के बाद उन्हें अपने गृह राज्य का भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) कैडर मिले। लेकिन, 2025 बैच (CSE 2025) के लिए जारी नई कैडर आवंटन नीति ने बिहार के सामान्य (General/UR), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के अभ्यर्थियों को बड़ा झटका दिया है। इस नई नीति के तहत, इन श्रेणियों के लिए बिहार होम कैडर में इनसाइडर वैकेंसी शून्य कर दी गई है। यह बदलाव बिहार के अभ्यर्थियों के बीच गहरी चिंता का विषय बन गया है।
नई कैडर नीति: क्या बदला और क्यों?
कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जनवरी 2026 से लागू होने वाली इस नई कैडर आवंटन नीति में पुरानी जोन व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। इसकी जगह चार नए ग्रुप बनाए गए हैं, और बिहार को ग्रुप-I में रखा गया है। होम कैडर की वैकेंसी पहले भरी जाती हैं, लेकिन यदि किसी श्रेणी में पर्याप्त इनसाइडर अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होते हैं या उच्च रैंक वाले अभ्यर्थी उन सीटों को पहले ही भर लेते हैं, तो उस श्रेणी की होम वैकेंसी को शून्य माना जा सकता है। इसी प्रावधान के तहत, बिहार में UR, OBC और EWS कैटेगरी के लिए इस बार इनसाइडर स्लॉट उपलब्ध नहीं होने की खबरें सामने आई हैं।






बिहारी अभ्यर्थियों पर क्या होगा असर?
इस नई नीति का सीधा असर बिहार के सामान्य, OBC और EWS वर्ग के उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा, जो अपने गृह राज्य में सेवा देने की इच्छा रखते हैं। उन्हें अब बिहार कैडर प्राप्त करने के लिए दूसरे राज्यों के आउटसाइडर स्लॉट पर निर्भर रहना होगा। हालांकि, नीति के अनुसार, होम स्टेट को आउटसाइडर के रूप में भी सीमित किया गया है। अभ्यर्थियों को होम कैडर के लिए स्पष्ट रूप से अपनी इच्छा जतानी होगी, अन्यथा उन्हें होम कैडर बिल्कुल नहीं मिलेगा। यह स्थिति उन हजारों छात्रों के लिए चिंताजनक है जो वर्षों से बिहार में सेवा करने का सपना संजोए हुए थे।

नई नीति के तहत, बिहार के सामान्य, OBC और EWS श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए गृह राज्य में IAS कैडर की इनसाइडर वैकेंसी शून्य कर दी गई है। अब उन्हें अन्य राज्यों के आउटसाइडर स्लॉट पर निर्भर रहना होगा।
SC/ST वर्ग के लिए अलग समीकरण
अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के अभ्यर्थियों पर इस नीति का प्रभाव कम या अलग हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके लिए रोटेशन और आरक्षण रोस्टर अलग तरीके से काम करता है, जिससे उनकी होम कैडर आवंटन की प्रक्रिया भिन्न हो सकती है।
इस बदलाव के कारण, बिहार के कई अभ्यर्थी अब उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश जैसे अन्य राज्यों के कैडर में अपनी उम्मीदें तलाश रहे हैं। यह स्थिति न केवल व्यक्तिगत अभ्यर्थियों के लिए, बल्कि भविष्य में बिहार के प्रशासनिक ढांचे के लिए भी दूरगामी परिणाम ला सकती है, क्योंकि राज्य को अपने प्रतिभाशाली युवाओं की सेवाओं से वंचित होना पड़ सकता है।









