उत्पाद शुल्क: केंद्र सरकार ने निर्यात किए जाने वाले पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) पर उत्पाद शुल्क की दरों में बदलाव की घोषणा की है। वित्त मंत्रालय द्वारा बुधवार देर रात जारी अधिसूचना के अनुसार, यह नई दरें 16 जुलाई से तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। इस फैसले से जहां निर्यात वाले डीजल और एटीएफ पर शुल्क बढ़ा है, वहीं पेट्रोल निर्यातकों को मामूली राहत मिली है।
सीधे जेब पर असर! सरकार ने पेट्रोल-डीजल के निर्यात शुल्क में किया बड़ा बदलाव, जानें नई दरें
Export Duty India: केंद्र सरकार ने निर्यात किए जाने वाले पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) पर उत्पाद शुल्क की दरों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय की ओर से बुधवार देर रात जारी अधिसूचना के अनुसार, नई दरें 16 जुलाई से प्रभावी हो गई हैं। निर्यात वाले डीजल और एटीएफ पर उत्पाद शुल्क सात-सात रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिया गया है, जबकि पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 1.50 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है।






यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर को ध्यान में रखते हुए किया गया है। सरकार इस नीति के जरिए निर्यातकों को अत्यधिक लाभ कमाने से रोकना चाहती है, जिससे घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित न हो।
पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर बदला विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क
अधिसूचना के मुताबिक, निर्यात होने वाले पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) अब चार रुपये प्रति लीटर से घटाकर 1.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, डीजल पर एसएईडी 8.50 रुपये से बढ़ाकर 15.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। विमान ईंधन (एटीएफ) पर भी एसएईडी 7.50 रुपये से बढ़ाकर 14.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
ये दरें हर पखवाड़े, यानी हर 15 दिन में, अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के आधार पर संशोधित की जाती हैं। इसे आमतौर पर ‘विंडफॉल टैक्स’ के नाम से भी जाना जाता है।
क्यों लगाया जाता है विंडफॉल टैक्स?
विंडफॉल टैक्स का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक हुए बड़े मुनाफे का फायदा उठाते हुए घरेलू बाजार से अधिक निर्यात न करने लगें। यदि निर्यातकों को अत्यधिक लाभ होता है, तो वे घरेलू आपूर्ति की परवाह किए बिना अधिक से अधिक ईंधन का निर्यात कर सकते हैं, जिससे देश के भीतर कमी हो सकती है।
सरकार इस टैक्स के माध्यम से एक संतुलन बनाने का प्रयास करती है, ताकि निर्यातकों को नुकसान भी न हो और वे अवांछित रूप से बड़ा लाभ भी न कमा सकें। यह नीति घरेलू बाजार में ईंधन की स्थिरता बनाए रखने में मदद करती है।
निर्यातित ईंधन पर बढ़ा शुल्क, पेट्रोल को मिली राहत
अधिसूचना के मुताबिक, निर्यात होने वाले डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) पर उत्पाद शुल्क में सात-सात रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, निर्यातित पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 1.50 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है। इस बदलाव के बाद, निर्यात होने वाले पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) चार रुपये प्रति लीटर से कम होकर 1.50 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
डीजल पर SAED 8.50 रुपये से बढ़कर अब 15.50 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इसी तरह, विमान ईंधन (एटीएफ) पर SAED 7.50 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 14.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में परिवर्तन को ध्यान में रखकर लिया गया है।
क्यों बदला जाता है ‘विंडफॉल टैक्स’?
निर्यात होने वाले पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर लगाए जाने वाले उत्पाद शुल्क की समीक्षा हर पखवाड़े की जाती है। इसे ‘विंडफॉल टैक्स’ के नाम से भी जाना जाता है। इस शुल्क में बदलाव का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव से अत्यधिक लाभ न हो।
सरकार का लक्ष्य निर्यातकों के मुनाफे को एक निश्चित सीमा में रखना और घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना है। यदि निर्यातकों को बहुत अधिक लाभ होता है, तो वे अचानक निर्यात बढ़ा सकते हैं, जिससे देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। यह नीतिगत कदम घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों के अनुरूप देश के ईंधन निर्यात और घरेलू बाजार के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया गया है, जिसका सीधा असर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े आयात-निर्यात पर पड़ेगा।








