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दरभंगा के इस लाल ने दुनिया में रोशन किया नाम, कुवैत युद्ध में बचाई थी हजारों जान ! अमेरिका के ह्यूस्टन में ई. राम मोहन लाल मल्लिक का निधन| रतनपुर का रत्न – छाया शोक!

Bihar Scientist: अमेरिका के ह्यूस्टन में 84 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस। गांव के पहले इंजीनियर से अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक तक का उनका सफर प्रेरणादायी रहा; कुवैत युद्ध में बचाई थी हजारों भारतीयों की जान।

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Bihar Scientist: बिहार के दरभंगा जिले के रतनपुर अभिमान गांव ने अपना एक महान सपूत खो दिया है। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक और समाजसेवी ई. राम मोहन लाल मल्लिक का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने अमेरिका के ह्यूस्टन में 5 सितंबर की दोपहर करीब साढ़े तीन बजे (भारतीय समयानुसार 6 सितंबर की रात डेढ़ बजे) अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से रतनपुर अभिमान समेत पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

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अभावों से उठकर बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान

ई. मल्लिक का जन्म 2 जनवरी 1942 को रतनपुर अभिमान के प्रतिष्ठित मल्लिक कायस्थ परिवार में स्वर्गीय नागेश्वर लाल मल्लिक के घर हुआ था। सात भाइयों में सबसे बड़े राम मोहन मल्लिक ने बेहद अभावों के बीच अपनी शिक्षा पूरी की, लेकिन अपनी असाधारण प्रतिभा से उन्होंने लोहा मनवाया। उन्होंने ब्रह्मपुर स्थित ठाकुर बिंदेश्वर शर्मा हाई स्कूल से पढ़ाई की और वर्ष 1958 की मैट्रिक परीक्षा में पूरे जिले में प्रथम स्थान हासिल किया। इसके बाद, 1963 में उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से केमिकल व माइनिंग इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की और अपने गांव के पहले इंजीनियर बने। उनका करियर देश की सीमाओं को लांघकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा। मध्य-पूर्व में काम करने के बाद, वे अमेरिका चले गए और ह्यूस्टन की प्रतिष्ठित फ्लोर कॉर्पोरेशन में ‘डायरेक्टर, प्रोसेस टेक्नोलॉजी’ जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहे।

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कुवैत युद्ध में बने हजारों भारतीयों के मसीहा

वर्ष 1990 में इराक-कुवैत युद्ध के दौरान कुवैत में पदस्थापित ई. मल्लिक ने वहां फंसे हजारों भारतीयों को संगठित कर उनकी सुरक्षित वतन वापसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी यह मानवीय पहल आज भी याद की जाती है।

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विदेश में रहने के बावजूद उनका अपनी जन्मभूमि बिहार से गहरा जुड़ाव बना रहा। वर्ष 2003-04 में उन्होंने ‘बिहार एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका’ के अध्यक्ष के रूप में बिहारी-झारखंडी समुदाय को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई। वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्र में सक्रिय रहने के साथ-साथ वे पूजा-पाठ, रामचरितमानस और शास्त्रों के अध्ययन व लेखन में भी गहरी रुचि रखते थे।

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भरा-पूरा परिवार छोड़ गए पीछे

ई. राम मोहन लाल मल्लिक अपने पीछे अपनी पत्नी सरस्वती देवी, पुत्र अरविंद मल्लिक और दो पुत्रियों हेमा मल्लिक व अलका मल्लिक सहित एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। अमेरिका में भारतीय समुदाय की मौजूदगी में बुधवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन से एक ऐसे व्यक्तित्व का अंत हो गया, जिसने अपनी लगन, ज्ञान और सेवाभाव से न केवल अपने गांव, जिले और राज्य का नाम रोशन किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का मान बढ़ाया।

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